राजधानी में मेट्रो मैन बनने की होड़ मची हुई है। मुख्यमंत्री ने मेट्रो में रुचि क्या दिखाई आवास विभाग पूरा मेट्रोमय हो गया है।
नया ऑफिस बनाया गया है। पूरी तरह से कॉरपोरेट लुक दिया गया है। तैनातियां भी हो गई हैं। मेट्रो की जिम्मेदारी आवास विभाग के पास है।
मीटिंग में मेट्रो, फाइल में मेट्रो और यहां तक कि बातचीत में भी मेट्रो ही मेट्रो। बड़े अधिकारियों को कौन बताए कि केवल मेट्रो से ही काम नहीं चलेगा।
प्रदेश के लोगों को छत भी चाहिए। यह तभी संभव होगा जब योजनाएं आएं। पर सरकारी योजनाएं न के बराबर आ रही हैं। आ रही हैं तो केवल निजी विकासकर्ताओं की। पिछले दिनों विकास प्राधिकरण उपाध्यक्षों की बैठक बुलाई गई थी।
इसमें चर्चाएं तो खूब हुईं पर योजना लाने के बारे में कोई विचार नहीं हुआ। यह बात जरूर रही कि मेट्रो को लेकर कुछ अधिकारियों ने अपनी पीठ जरूर थपथपवानी चाहिए।