मोदी के नाम पर यूपी में किसी करिश्मे की उम्मीद कर रही प्रदेश भाजपा जनांदोलन और दूसरे फैसलों के अमल को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रही।
इसके अलावा कामकाज के बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर का असंतोष बाहर आने लगा है।
पार्टी के एक धड़े का आरोप है हर बैठक में एक नई घोषणा तो हो जाती है लेकिन अगली बैठक में उस घोषणा के अमल की समीक्षा के बजाय पार्टी पदाधिकारी नए निर्णयों की तरफ बढ़ जाते हैं।
नतीजतन जमीन पर कम, कागजों पर ज्यादा काम होता दिख रहा है। बात चाहे गेहूं खरीद केंद्रों की निगरानी की हो या फिर गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान व बकाया भुगतान के लिए आंदोलन चलाने की।
जनसमस्याओं को लेकर जगह-जगह आंदोलन चलाने का निर्णय हो अथवा लोगों से संपर्क व संवाद बढ़ाने की बात, कोई भी फैसला जमीनी स्तर पर बहुत असर डालता नहीं दिख रहा है।