कहावत है दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है। वही हाल इस बार टीम राजनाथ सिंह का है।
टीम का पूरा ध्यान इस बात पर है कि अति उत्साह में कोई यह नारा न लगा बैठे, ‘देश का पीएम कैसा हो, राजनाथ सिंह जैसा हो’ और फिर चुनाव का हाल कहीं 1993 जैसा न हो जाए।
दरअसल, 1993 में उनके लिए नारा लगा था कि हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो, राजनाथ सिंह जैसा हो।
नतीजतन उस समय सूबे के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के स्वजातीय वोट ने ऐसी करवट बदली कि राजनाथ बीच रास्ते में ही अटक गए। इसलिए इस बार उनके कैंप में पहली हिदायत यही होती है पीएम पर... न बाबा न।