रामपुर वाले खां साहब की जरा सी नाराजगी पर नेताजी से लेकर पार्टी के बड़े-बड़े नेता तक हिल जाते हैं।
लेकिन विधानसभा कैंटीन में खानपान की व्यवस्था करने वाला कर्मचारी कल्याण निगम है कि उनकी नाराजगी को तवज्जो ही नहीं देता।
विधानमंडल सत्र के सिलसिले में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कैंटीन के आइटमों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
किसी ने काजू में घुन लगे होने की बात कही तो खां साहब तपाक से बोले-पकौड़े में बदबू आती है।
एक वरिष्ठ मंत्री ने चुटकी ली-कभी ढोकला टेस्ट करके देखिए कि उसका पानी कैसा है? खानपान की गुणवत्ता का मसला हंसी-मजाक में किनारे होने लगा तो खां साहब से रहा नहीं गया।
बोले-इतनी बार कह चुका हूं, कोई सुनता ही नहीं। बैठक में मौजूद एक नेता बाहर निकले तो बोले कि भइया, बड़ी बात नहीं कि किसी दिन खां साहब के सब्र का बांध टूट जाए और वे सरकार को चिट्ठी लिख मारें।
अच्छा तो यही है सरकार खां साहब को उनके टेस्ट का खाना खिलाने वाले को ही कैंटीन का ठेका दे दे। कम से कम सरकार के मुंह का स्वाद तो खराब नहीं होगा।