फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगंज अग्निकांड: जिंदा बचे आसिफ ने किया खुलासा, दो वर्ष पहले भी बिल्डिंग में सुलगी थी मौत की चिंगारी

Wed, 24 Jun 2026 09:49 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

आग के दौरान बिल्डिंग से कूदकर जान बचाने वाले मोहम्मद आसिफ घटना के बाद से सदमे में हैं। घर में ही उनका उपचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि पहले हुए हादसे से भी सबक नहीं लिया गया।
विज्ञापन
आग के दौरान बिल्डिंग से कूदकर जान बचाने वाले मोहम्मद आसिफ घटना के बाद से सदमे में हैं। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगंज स्थित एनीमेशन सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के दो वर्ष पहले भी मौत की चिंगारियां उठी थीं। उस वक्त शॉर्ट सर्किट हुआ था, फिर भी जिम्मेदार सोए रहे। शॉर्ट सर्किट की जानकारी बहुत से अधिकारियों को भी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। न ही घटना से सबक लेते हुए सेंटर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।

विज्ञापन


अलीगंज अग्निकांड में बाल-बाल बचे आशियाना निवासी मोहम्मद आसिफ ने खुलासा किया कि वर्ष 2024 के मई-जून के महीने में दोपहर के वक्त सेंटर में शॉर्ट सर्किट हुआ था। इस घटना से पूरे सेंटर में धुआं फैलने से अफरातफरी मच गई थी। उस वक्त सेंटर प्रबंधन ने हम लोगों की छुट्टी कर दी थी। दो दिन बाद स्थिति सामान्य होने पर दोबारा बुलाया था।

ये भी पढ़ें - लखनऊ अग्निकांड: 15 युवाओं की जान लेने वाली अवैध बिल्डिंग बनवाने में 18 दोषी, LDA वीसी ने शासन को भेजी रिपोर्ट
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - लखनऊ अग्निकांड: हैरान करने वाली सभी 15 मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, किसी की भी जान आग से झुलसने से नहीं गई


मोहम्मद आसिफ ने बताया कि दो वर्ष पहले भी सेंटर में आने-जाने का केवल एक रास्ता था। छत पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी, वहां लोहे का मजबूत दरवाजा लगाकर ताला जड़ दिया गया था। उस वक्त शॉर्ट सर्किट से कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन वहां काम करने वाले कर्मचारियों और छात्रों के अंदर डर का माहौल जरूर बन गया था।

उस वक्त घटना से सबक लेकर आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था कर दी गई होती तो 15 साथियों की जान नहीं जाती। इस हादसे के लिए प्रशासन भी बराबर का जिम्मेदार है क्योंकि उन्होंने कभी सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने या निर्देश देने की जहमत नहीं उठाई। 

30 मिनट के अंदर 15 की हो गई मौत
आसिफ ने बताया कि अलीगंज अग्निकांड में महज 30 मिनट के अंदर ही उनके 15 साथियों की मौत हो गई। हालात इतने बदतर थे कि जिंदा लोगों को बचाना तो दूर, मौत के बाद शवों को बाहर निकालने के लिए भी कोई रास्ता नहीं बचा था। सेंटर का मुख्य द्वार बायोमीट्रिक था, जो फेस डिटेक्शन के बाद ही खुलता या बंद होता था। आग लगते ही बायोमीट्रिक सिस्टम अपने आप लॉक हो गया, जिससे कोई भी साथी गेट से बाहर नहीं निकल सका।

विज्ञापन

दो मिनट के अंदर ही करीब आ गई थी मौत

आसिफ कहते हैं कि मेरी किस्मत अच्छी थी कि किसी तरह जान बच गई। घटना के दो मिनट के अंदर ही मौत हमारे बेहद करीब आ गई थी। मुख्य दरवाजा बंद हो चुका था। हमने किसी तरह खिड़की का शीशा तोड़ा और इंटरनेट के केबल के सहारे नीचे कूदने का फैसला किया। नीचे भारी भीड़ जमा थी और लोग चिल्ला रहे थे कि बस नीचे कूद जाओ, जिंदगी बच जाएगी। हमारे पांच से छह साथी ही किसी तरह नीचे कूदकर मौत के मुंह से बाहर निकल पाए। अन्य साथी भीतर फंस गए और दम तोड़ दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें