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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय शुरू करेगा स्टार्टअप, सामाजिक सरोकारों पर भी करेगा खर्च

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लखनऊ। कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) फंड की तरह डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) अपने यहां इंस्टीट्यूट सोशल रिस्पांसबिलिटी (आईसीआर) फंड की स्थापना करेगा। इसमें सामाजिक सरोकारों व सहभागिता के लिए एक करोड़ रुपये आवंटित किया गया है, जिस पर मंगलवार को कार्य परिषद ने हरी झंडी दी।
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गौरतलब है कि राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की पहल पर विवि की ओर से हाल में आंगनबाड़ी केंद्रों को संसाधन दिए गए और पूर्व में टीबीग्रस्त बच्चों को भी गोद लिया गया है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई बैठक में इनोवेशन और स्टार्टअप के कार्यों में तेजी लाने के लिए आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर स्टार्टअप कंपनी बनाने के लिए हरी झंडी दी गई। वहीं मंत्री परिषद के निर्णय के अनुसार, स्टार्टअप के लिए 150 करोड़ रुपये देने और यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना के लिए 200 करोड़ रुपये देने पर भी सहमति दी गई। वहीं छात्र कल्याण निधि से एनसीसी, एनएसएस, हैकाथॉन से संबंधित गतिविधियों पर खर्च किए जाने की अनुमति दी गई। इसके साथ ही प्रति कुलपति प्रो. विनीत कंसल का कार्यकाल एक साल बढ़ाने और एआईसीटीई के निर्देश के अनुपालन में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसके त्रिपाठी की बतौर लोकपाल नियुक्ति किए जाने को अनुमोदन प्रदान किया गया।
अपना फार्मेसी इंस्टीट्यूट शुरू करेगा विवि
एकेटीयू इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर व मैनेजमेंट संस्थानों की तरह अपना फार्मेसी इंस्टीट्यूट भी शुरू करेगा। विवि की ओर से इसके लिए कवायद शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय की अपनी बाराबंकी की जमीन पर बीफार्मा व एमफार्मा का स्ववित्तपोषित संस्थान शुरू करने की स्वीकृति भी कार्य परिषद ने दी। यह एकेटीयू का अपना पहला फार्मेसी संस्थान होगा। यहां जो कोर्स चलेगा वह सेल्फ फाइनेंस मोड पर होगा। शिक्षक समेत व अन्य खर्च विवि को खुद वहन करेगा। हाल के दिनों में फार्मेसी की काफी डिमांड है।
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