लखनऊ। प्रदेश में इनोवेशन और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के शिक्षक व छात्र अब मिलकर भी स्टार्टअप बना और चला सकेंगे। विवि व संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक अकेले भी स्टार्टअप शुरू कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से नई इनोवेशन पॉलिसी लाई गई है।
एकेटीयू ने हाल ही में स्टूडेंट-फैकेल्टी इनोवेशन पॉलिसी बनाई है। इसे विभिन्न समितियों से मंजूरी के बाद अब लागू किया जा रहा है।
अभी तक छात्र ही स्टार्टअप शुरू करते थे और विवि का इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन हब इसमें सहयोग करता था। अब शिक्षक-छात्र मिलकर यह काम कर सकेंगे। शिक्षक मेंटर के रूप में भी काम कर सकेंगे। स्टार्टअप भी दोनों के संयुक्त नाम से होगा।
विश्वविद्यालय की 200 आइडिया को व्यावसायिक करने और 500 पेटेंट फाइल करने की योजना है। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा, इनोवेशन और स्टार्टअप आज की जरूरत है। इसे पढ़ाई के अंग के रूप में शामिल किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि जिला स्तर पर भी ज्यादा से ज्यादा इनोवेशन हो और उसे इंक्यूबेट करके स्टार्टअप के रूप में संचालित किया जा सके।
100 करोड़ की इनोवेशन निधि मंजूर
प्रो. पांडेय ने बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के तीनों तकनीकी विश्वविद्यालयों में इनोवेशन सेंटर बनाने का निर्देश दिया है। विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए प्रदेश सरकार वित्तीय मदद भी करेगी। इसी क्रम में विवि की वित्त समिति ने पिछले दिनों 100 करोड़ रुपये के इनोवेशन निधि के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे छात्रों को इनोवेशन और स्टार्टअप के लिए मदद की जाएगी।