लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में इस बार का चांसलर मेडल केआईईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन गाजियाबाद के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के छात्र रोहन खुराना को दिया जाएगा। वहीं दो साल पहले शुरू किया गया कमल रानी वरण स्मृति पदक गोयल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ की प्रिया भारती को दिया जाएगा।
यह निर्णय मंगलवार को कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र की अध्यक्षता में हुई परीक्षा समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में 26 नवंबर को होने वाले 20वें दीक्षांत समारोह में दिए जाने वाले अन्य पदकों पर भी मुहर लगाई गई। विवि से संबद्ध संस्थानों और राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों में 17 गोल्ड मेडल, 16 सिल्वर और 16 ब्रोंज मेडल भी दिए जाएंगे। जबकि विवि के घटक संस्थानों के छात्रों में 11 गोल्ड मेडल, छह सिल्वर मेडल और सात ब्रोंज मेडल दिए जाएंगे। समारोह में कुल 48,343 छात्रों को डिग्री दी जाएगी। बैठक में कुलसचिव सचिन सिंह, वित्त अधिकारी जीपी सिंह, प्रति कुलपति प्रो. मनीष गौड़, परीक्षा नियंत्रक प्रो. अनुराग त्रिपाठी, प्रो. एचके पालीवाल, प्रो. वंदना सहगल, प्रो. बीएन मिश्रा आदि मौजूद रहे।
छात्रों से धन उगाही पर होगी एफआईआर
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कुछ लोगों की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों को भ्रमित कर परीक्षा के नाम पर वसूली की जा रही है। ऐसा करने वालों के खिलाफ एफआईआए दर्ज की जाएगी। सोशल मीडिया पर यह बताने पर भी सहमति बनी कि परीक्षा से संबंधित किसी प्रकार का शुल्क नकद नहीं लिया जाता है।
सहयोग न करने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई
बैठक में यह भी तय हुआ कि परीक्षा के बाद कॉपियों के मूल्यांकन से दूरी बनाने वाले संस्थानों की संबद्धता की समीक्षा की जाएगी। कोई भी कॉलेज मूल्यांकन से मना नहीं कर सकता है। वहीं विश्वविद्यालय के छात्र अब अपने शिक्षक के बारे में अपनी राय भी दे सकेंगे। इसके लिए फीडबैक फॉर्म जारी होगा, जोकि छात्र के आईडी पर उपलब्ध होगा।
खुद पर विश्वास, अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ें
कैंपस प्लेसमेंट में मेरा चयन यूकेजी अल्टीमेट क्रोनोस ग्रुप में क्यूए सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर हुआ है। आगे भी इसी क्षेत्र में और बेहतर पोजिशन पाने का प्रयास करूंगा। पढ़ाई के साथ मैं स्टूडेंट कम्युनिटी में विद्यार्थियों की हेल्प करता रहा हूं। आगे भी इसे जारी रखना है, विद्यार्थियों को सॉफ्टवेयर के साथ इंडस्ट्री के लिए तैयार करूंगा। बड़ी बहन दिव्या खुराना भी बीटेक कर बंगलौर में जॉब कर रही है। उसी से प्रेरित होकर इस तरफ आया। युवाओं से कहना है कि सफलता भले न मिले लेकिन खुद पर विश्वास कर अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़े। पिता रमेश खुराना बिजनेसमैन और मां अंजना खुराना गृहिणी हैं।
- रोहन खुराना, बीटेक, चांसलर गोल्ड मेडल