आचार्य प्रदीप ने बताया कि अक्षय तृतीया पर आभूषण, सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात, जमीन, खेत, प्रॉपर्टी, मकान, कार, बाइक, इलेक्ट्रॉनिक आइटम खरीदने के लिए लग्न के अनुसार इस बार कई शुभ मुहूर्त हैं।
सोना, चांदी, जमीन, खेत, प्रॉपर्टी, मकान आदि खरीदने के लिए शुभ मुहूर्त
सुबह 7.03 बजे से 9 बजे तक, दोपहर 1.31 बजे से 3.45 बजे तक और रात 8.14 बजे से 10.32 बजे तक।
इसके अलावा टीवी, फ्रिज, एसी, एलईडी, मोबाइल टीवी समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम इन मुहूर्त में खरीदना शुभ रहेगा।
सुबह 11.14 से दोपहर 1.31 बजे तक, दोपहर 3.45 से गोधूलि बेला तक।
अक्षय तृतीया का अबुझ मुहूर्त होने के अलावा वैवाहिक लग्नों के कारण शहर में बैंड-बाजा-बारात की धूम रहेगी। राजधानी समेत आसपास के कस्बाई इलाकों में तमाम मांगलिक आयोजन होंगे। आलमबाग में सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार होंगे। अक्षय तृतीया पर इस बार सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। इस दिन मांगलिक कार्य का विशेष लाभ मिलेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग किसी शुभ कार्य को करने का शुभ मुहूर्त होता है।
इस मुहूर्त में शुक्र अस्त, पंचक, भद्रा आदि पर विचार करने की जरूरत नहीं होती है। जैन समाज इस दिन को इक्षु तृतीया के रूप में मनाता है। मुख्य आयोजन डालीगंज के पार्श्वनाथ जैन मंदिर में होगा। नगर के जैन मंदिरों में अभिषेक, शांति धारा, भक्तांबर का पाठ करने के बाद खासतौर से 48 नारियल चढ़ाए जाएंगे। डालीगंज स्थित मनकामेश्वर मठ मंदिर में भी पूजन होंगे।
द्वापर में वैशाख शुक्ल तृतीया को जब भगवान परशुराम का अवतार हुआ तब छह ग्रह उच्च राशि में थे। भगवान परशुराम के अवतार के समय पुनर्वसु नक्षत्र था। आचार्य ने बताया कि इसी दिन ब्राह्मण श्रेष्ठ भगवान परशुराम जयंती भी मनाई जाएगा। जिनका गोत्र जमदग्नि हो, वे विशेष आराधना करें। अक्षय तृतीया को ईश्वरीय तिथि माना गया है। मान्यता है कि इसी दिन से त्रेतायुग का शुभारंभ हुआ था। इसीलिए इसे युगाब्दि तृतीया भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान, धर्म का पुण्य कभी भी नष्ट नहीं होता। किसी भी वस्तु का नाश न हो इसलिए अक्षय तृतीया मनाई जाती है।
भविष्य पुराण के मुताबिक, अक्षय तृतीया को पुण्य तिथि भी कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान विशेष फल देता है। सुबह स्नान के बाद भगवान नारायण का पूजन करने के बाद जल से भरा घटदान-कुंभदान करना चाहिए। साथ में मौसमी फल, सफेद मिष्ठान्न रहें तो और भी अच्छा रहेगा। संकल्पित दान भी करना चाहिए। अक्षय तृतीया को सौभाग्य दिवस भी कहा जाता है। इस दिन परिवार की महिलाएं विशेष व्रत-पूजन से परिवार में सिद्धि लाती हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार इसे लक्ष्मी सिद्धि दिवस भी कहते हैं।