बृजेन्द्र ने पुलिस और जू अधिकारियों को बताया कि उसने नवंबर 2013 से मई 2015 तक लखनऊ जू में रेंजर पियूष मोहन के मौखिक निर्देशों पर काम किया। जिनमें पार्किंग निर्माण समेत कई स्थानों पर समय-समय पर अन्य कंटाई-छंटाई के काम किये। लेकिन आज तक उनसे भुगतान नहीं मिला।
बृजेन्द्र का आरोप है कि ऊंची पहुंच रसूख के चलते भुगतान रोका गया। कुछ दिनों पहले सीएम कार्यालय को भी शिकायत की, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने पर रविवार को उसने ये कदम उठाया। नीचे उतर जाने पर निदेशक कार्यालय में पुलिस अधिकारियों और जू प्रशासन के अधिकारियों ने मामले में लकड़ी ठेकेदार को पूरे मामले की जांच कराने समेत समझा बुझाकर शांत किया।
लखनऊ जू के निदेशक आरके सिंह ने कहा है कि पीड़ित बृजेंन्द्र ने भुगतान न किये जाने को लेकर जो आरोप लगाये हैं, उनकी पड़ताल की जायेगी। चूंकि उसने खुद कहा है कि उसने अधिकतर काम मौखिक निर्देशों पर ही किये हैं। उसने काम कब किये, कहां किये, कितना बकाया है, इसकी जांच मंगलवार से की जायेगी। उससे भी कागज मंगवाये गये हैं, उसके बाद उसके बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया होगी।