अमेरिका में ऐसी बहुत सारी बीमारियां नहीं हैं जो भारत में हैं। वहां एक भी केस नहीं जो गर्भवती महिला 500-600 किमी पैदल चली हो। प्रसव के बाद भी 100 किमी का सफर तय किया हो। अमेरिका में किसी का नाम लॉकडाउन सिंह या बॉर्डर सिंह रखा गया, हो तो बताएं। अमेरिका, स्पेन, इटली को देखने के बजाय सरकार चाहे तो फिर थाली और ताली बजवा ले और कहे कि देश में अब कोरोना वायरस नहीं है।
सरकार के फैसलों से अर्थव्यवस्था खत्म हो गई है
इस सरकार ने जो भी फैसले किए, सोच-समझकर नहीं किए। अभी पुराने फैसलों पर बात करने का समय नहीं है, लेकिन नोटबंदी, जीएसटी व कोविड-19 को लेकर फैसलों से अर्थव्यवस्था खत्म हो गई है। सरकार की व्यवस्था न होने से मजबूरी में भूखे-प्यासे मजदूर पैदल, साइकिल, बाइक व रिक्शों से घरों के लिए चल दिए।
इस दौरान उन्हें अपमान और उत्पीड़न झेलना पड़ा। कितने ही लोगों की मौत हो गई, सड़कों पर प्रसव हुए। सरकार की संवेदनहीनता है कि उसने लॉकडाउन में हादसों व अन्य कारणों से जान गंवाने वाले एक भी श्रमिक परिवार की आर्थिक मदद नहीं की। सपा ने 70 श्रमिक परिवारों को एक-एक लाख रुपये की सहायता दी। सरकार चाहती तो गर्भवती महिलाओं के लिए मुख्य मार्गों पर एंबुलेंस की व्यवस्था कर सकती थी। प्रदेश में 90 हजार बसें हैं। प्लानिंग होती तो किसी भी मजदूर को घर जाने के लिए सैकड़ों किमी पैदल न चलना पड़ता।
अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राहत पैकेज पर कहा कि यह राहत पैकेज नहीं, ऋण है। इसे वापस करना पड़ेगा। दुनिया में पहली बार लोन को राहत पैकेज बताकर प्रचारित किया गया। पुरानी योजनाओं को एक जगह क्लब किया गया है।
किसानों को राहत देने के बजाय कर्ज पर जीने की सलाह दी जा रही है। खरीद केंद्र नहीं खुलने से किसानों को कई फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पाया। गन्ना किसानों का 17 हजार करोड़ रुपये भुगतान बकाया है। बुंदेलखंड में दलहन की खेती बर्बाद हो गई। फल-सब्जी के किसानों की कमर टूट गई।
ये वर्चुअल नहीं, खर्चुअल रैलियां हैं
अखिलेश यादव ने भाजपा द्वारा की जा रही रैलियों पर कहा कि ये वर्चुअल नहीं, खर्चुअल रैलियां हैं। भाजपा के पास फंड है, संसाधन हैं। हम इतना खर्च नहीं कर सकते। वर्चुअल रैली में 60-70 हजार एलईडी लगाए जाते हैं, जनरेटर, ट्रक, कार समेत साधन लगते हैं। वे चीनी उपकरणों की मदद से खर्चुअल रैली कर रहे हैं और हम व्हाट्सएप कॉलिंग कर रहे हैं। व्हाट्सएप चीन का नहीं है। भाजपा को अगर डिजिटल तकनीक पर भरोसा है तो वादा करके क्यों छात्रों को लैपटॉप नहीं बांटे? क्यों मुफ्त में डाटा नहीं दिया? सपा सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का जो काम शुरू हुआ, उसे क्यों आगे नहीं बढ़ाती?