‘हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद हम बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन नहीं दे पा रहे। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जानकारी का हाल यह है कि वे मुझमें और राहुल गांधी में अंतर नहीं कर पाते। हम इस सिस्टम को सुधारने का लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन गुणवत्ता के लिहाज से निजी शिक्षण संस्थाएं बेहतर काम कर रही हैं।’
यह पीड़ा जाहिर की है सूबे के मुखिया अखिलेश यादव ने। मुख्यमंत्री ने यह बात रविवार को वे राजधानी के सुशांत गोल्फ सिटी में सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल के उद्घाटन समारोह में कही।
शिक्षामित्र भी नहीं चाहते, उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें
मुख्यमंत्री ने समारोह में अपना अनुभव बताया- ‘कुछ दिन पहले मुझसे मिलने कुछ शिक्षामित्र आए थे। मैंने उनसे पूछा कि उनमें से कितने लोग अपने बच्चों को उन स्कूलों में दाखिला दिलवाना पसंद करेंगे, जिसमें वे पढ़ा रहे हैं। इस सवाल पर एक भी शिक्षामित्र का जवाब ‘हां’ में नहीं मिला। वे भी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं।’