मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खुद को मुलायम सिंह की तरह बताया है। मुलायम सिंह के विधानसभा में दिए गए भाषणों के संकलन का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा ‘लाइक फादर-लाइक सन’ (जैसा पिता-वैसा बेटा)।
दरअसल विधानसभा की ओर से तीन खंड में प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन खुद सपा संरक्षक मुलायम सिंह को करना था, लेकिन वे नहीं आ सके।
अखिलेश ने कहा भी, वह नहीं आ सके और यह मौका मुझे मिल गया। एक दिन पहले ही मुलायम की पत्नी साधना यादव के बयान के बाद अखिलेश के इस बयान के निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग नेताजी के बारे में, समाजवाद के बारे में जानना चाहेंगे, रिसर्च करेंगे, कोई नीति बनना चाहेंगे, उनमें ये पुस्तकें मददगार साबित होंगी। विधानसभा जब शुरू हुई किसानों की जो समस्या तब थी, कमोवेश अब भी हैं।
1967 से 2009 तक के मुलायम के भाषण
यह पुस्तक इन मुद्दों को समझने और उनके समाधान सुझाने में मददगार हो सकती है। तीन खंड की इस पुस्तक में 1967 से 2009 के बीच विधानसभा में विभिन्न भूमिकाओं में मुलायम सिंह के भाषण का संकलन है। इस मौके पर माता प्रसाद पांडेय के भाषण के संकलन पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
माता प्रसाद 1980 से कई बार विधायक रहे और विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका निभाने का अवसर भी मिला। पांडेय ने कहा कि ये पुस्तकें नए विधायकों के लिए भी उपयोगी साबित होंगी। इस मौके पर मंत्री बलराम यादव व राजेंद्र चौधरी उपस्थित थे।
जमीनी नेता की तरह बात करते हैं नेताजी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने यह किताब पूरी नहीं पढ़ी है, पर नेताजी को विधानसभा में और लोकसभा में बोलते हुए सुना है। एक बार लोकसभा में जनसंख्या पर बहस हो रही थी।
सांसदों ने तमाम आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी, मगर नेताजी ने बताया कि घर की समस्या जनसंख्या की समस्या से जुड़ी है। लोगों के पास अपने घर तक नहीं हैं। दूसरे सांसदों की बात समझने में लोगों को मुश्किल आती थी लेकिन नेताजी बोलते थे तो लोग समझते थे कि कोई जमीन का नेता बोल रहा है।
गायों को चारा खिलाने पर सीएम ने पीएम पर किया कटाक्ष
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मुख्यमंत्री ने गढ़वा घाट आश्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गायों को चारा खिलाने पर कटाक्ष किया। प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना कहा कि अभी अखबारों में एक तस्वीर छपी है बिना काटे चारा खिलाते हुए।
उन्हें नहीं पता कि चारा सीधा नहीं खिलाया जाता। मशीन से कटकर आता है तब जानवरों को खिलाया जाता है। यह बात जो गरीब है, जिसने गाय पाली है वही समझ सकता है।
कुछ और किए बिना टीवी पर नहीं रह सकते लाइव
मुख्यमंत्री ने टीवी चैनल्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, हम तो सोचते हैं कि लोग टीवी पर लाइव कैसे रहते हैं? लोकतंत्र के लिए टीवी पर सबको आने पर टाइम मिलना चाहिए।
चुनाव आयोग को आने वाले समय में हर राजनीतिक दल को बराबर समय देना चाहिए। मुद्दे पर बात रखने का बराबर अवसर देना चाहिए। अब तो वह भी मैनेज होने लगा है।
आप कितने भी अच्छे हों, कितने अच्छे काम करें, लेकिन आप लाइव नहीं रह सकते। स्थिति ये है कि लाइव रहने के लिए कुछ और करना पड़ेगा, तब लाइव रह पाओगे। लोकतंत्र के लिए यह बड़ा खतरा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में सपा सबसे आगे रही है।