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घटनाओं के बजाय पॉलिसी की पॉलिटिक्स हो : अखिलेश यादव

Fri, 29 Jul 2016 10:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि घटनाओं पर राजनीति न कर पॉलिसी (नीतियों) की पॉलिटिक्स किए जाने की आवश्यकता है। घटनाओं का जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना कई बार गलत साबित हो चुका है।
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मुख्यमंत्री शुक्रवार को अपने सरकारी आवास पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की गतिविधियों की चर्चा करते हुए कहा कि वहां नीतियों पर राजनीति हो रही है जबकि हमारे यहां घटनाओं पर निष्कर्ष निकालते हैं और सीधे सपा सरकार से जोड़ देते हैं।

उन्होंने कैराना के अलावा हाल ही में बसपा और भाजपा के बीच बदजुबानी की सियासत की ओर संकेत किया तो फैजाबाद से लेकर इटावा तक की घटनाओं का हवाला भी दिया। बदायूं की घटना की खास तौर से याद दिलाई। कहा, बदायूं मामले में उनकी जितनी बदनामी की गई, उतनी कहीं नहीं हुई, लेकिन बाद में क्या साबित हुआ?
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अखिलेश ने कहा कि ब्रेकिंग न्यूज के दबाव में समाचारों की विश्वसनीयता घटी है। मीडिया को याद रखना चाहिए कि जितनी जिम्मेदारी नेताओं की है, उससे ज्यादा पत्रकारों की है। लोग पत्रकारों पर बड़ा भरोसा रखते हैं।
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'मिल गए है ट्विटर व फेसबुक जैसे निजी ब्रॉडकास्टर'

- फोटो : amar ujala
अखिलेश ने मीडिया में बदलावों का हवाला देते हुए कहा कि आज सूचनाओं के लिए लोग अखबार या किसी माध्यम पर निर्भर नहीं रह गए हैं। तकनीक ने ट्विटर, फेसबुक जैसे निजी ब्रॉडकास्टर उपलब्ध करा दिए हैं।

लोग अपने मन की बात पूरी दुनिया के सामने खुद रख रहे हैं। वे सोशल मीडिया पर एक तस्वीर लगाते हैं तो उसे 25 लाख लोग देखते हैं। कौन सा अखबार है जो इतने लोगों तक पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि सच साहस के साथ कहा जाए तो राजनीति सुधर सकती है। प्रसिद्ध कवि गोपाल दास नीरज, इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सीबी पांडेय, पूर्व कुलपति विंद्रा प्रसाद मिश्र और वरिष्ठ पत्रकार के. विक्रम राव ने भी विचार रखे।

मीडिया वाले चढ़ाएंगे तो नीचे भी ले आएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा, साढ़े चार साल के अनुभव से मैं कह सकता हूं कि मीडिया जिसे ऊंचाई पर पहुंचाता है, उसे नीचे भी वही लाता है। भिन्न विचार वाले लोगों के विचारों से मैं सहमत हो सकता हूं लेकिन मान लूं यह जरूरी नहीं है।
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अंजान को सुनने पड़े असहमति के स्वर

अतुल अंजान - फोटो : amar ujala
वरिष्ठ वामपंथी नेता अतुल अंजान ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री से समान विचारधारा वाले लोगों को एक साथ जोड़ने की अपील की। साथ ही दिल्ली व अन्य राज्यों से यूपी की कानून-व्यवस्था की तुलना कर सूबे के राजकाज की तारीफ भी की।

इस पर सामने बैठे लोगों में से कुछ ने कानून-व्यवस्था के मामले में यूपी की बेहतर तस्वीर बताने पर ना-ना की आवाज बुलंद की।

हालांकि बाद में मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि सवाल उठाने वालों को 1090 वीमेन पावर लाइन पहुंचकर देखना चाहिए कि प्रदेश सरकार ने तीन लाख से ज्यादा महिलाओं की मदद की है। साथ ही दूसरे राज्यों के भी अपराध के आंकड़ों को देखना चाहिए।
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