उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री के वादों का पूरा होना अब पूरी तरह नामुमकिन हो गया है। इसलिए वे दूसरों की आलोचना तो खूब कर रहे है, लेकिन यह हिसाब नहीं देते कि 2014 में उन्होंने जो वादे किए थे उनका क्या हुआ?
इनकी जगह वे नए-नए मुद्दे उछाल रहे हैं। बिडंबना है कि अब तक शून्य रिपोर्ट कार्ड वाले मुख्यमंत्री भी उन्हीं की भाषा बोल रहे है। उन्होंने कहा, भाजपा नेता चाहे जितनी कवायद करें, मतदाता उनकी रग-रग से वाकिफ हो चला है।