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लखनऊ गैंगरेप: अब CBI के हवाले जांच

Mon, 28 Jul 2014 06:19 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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16 जुलाई की रात लखनऊ से करीब 30 किलोमीटर दूर मोहनलालगंज में हुई दरिंदगी की जांच में यूपी पुलिस एक बार फिर नाकारी साबित हुई है।
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रोजाना मीडिया के जरिए हो रहे नए खुलासों से खफा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार सुबह गैंगरेप कांड की जांच आखिरकार सीबीआई को सौंप दी।

डीजीपी एएल बनर्जी और प्रमुख सचिव गृह नीरज गुप्ता को बुलाकर सीएम अखिलेश ने फटकार लगाई और जांच को पूरी ईमानदारी से कराने के आदेश दिए।

दोनों पक्षों ने की थी मांग

ऐसे हाईप्रोफाइल मामले कम ही देखने को मिलते हैं, जिसमें दोनों ही पक्षों की ओर से सीबीआई जांच की मांग की गई हो।

लखनऊ गैंगरेप कांड में पुलिस की लीपापोती और किसी खास शख्स को बचाने के चक्कर में मनगढ़ंत कहानी से खफा पीड़ित और आरोपी दोनों ही परिवारों ने सीएम से सीबीआई जांच की मांग की थी।

यूपी पुलिस भी अपनी ‌एक बात पर कायम रहने में बुरी तरह नाकाम साबित रही। शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री को यह फैसला लेना पड़ा।

पुलिसिया कहानी में थे कई छेद

17 जुलाई को गैंगरेप की इस खौफनाक वारदात से मचे शोरशराबे के बीच यूपी पुलिस ने मामले को अपने अंदाज में रफा-दफा करने की कोशिश की।

विवादित तस्वीरों के जरिए मामले ने तूल पकड़ा और पुलिस ने झटपट पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच करवाकर मामले को रेप तक मानने से इनकार कर दिया।

एडीजी सुतापा सान्याल की देखरेख में हो रही इस मामले की जांच में किस कदर लापरवाही बरती गई, इसका खुलासा आने वाले दिनों में होता गया। पुसिल के पास कई अहम सवालों के जवाब नहीं थे।

कभी पोस्टमार्टम पर सवाल उठे, तो कभी किडनी पर। सान्याल जिसे रेप तक नहीं मान रहीं थी, उसे ही दूसरी फॉरेंसिक रिपोर्ट ने गैगरेप करार दे दिया।

फिर अफसरों ने कर लिया किनारा

रामसेवक पर दबाव बनाकर जुर्म कुबुलवाया गया था, यह बात तो गैंगरेप की पुष्टि से ही हो गई। उसके पहले ही मामला हाथ से जाता देख यूपी पुलिस के आला अधिकारियों ने केस से खुद को अलग करने की पूरी कोशिश की।

मुख्यमंत्री ने जिस एडीजी सुतापा सान्याल को जांच सौंपी थी, उन्होंने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। उसके बाद डीआईजी नवनीत सिकेरा ने भी मामले को डॉक्टरों की लापरवाही बताकर किनारा कर लिया।

लेकिन, नए खुलासे होते रहे। पीड़ित के परिवार ने राजधानी में दो बार धरना दिया। आरोपी के परिवार ने भी यूपी पुलिस पर संगीन आरोप लगाए और ‌आखिरकार जांच सीबीआई के हाथ में चली गई।
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यहां पढ़िए परत दर परत पूरा मामला

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