फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अखिलेश ने माना, अफसरों की वजह से हारे चुनाव!

Thu, 29 May 2014 09:59 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला,लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
अखिलेश का मानना है कि विकास योजनाओं में ढिलाई से ही सपा को आम चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। अब वह इस पर अफसरों से जवाब मांग रहे हैं।
विज्ञापन


सरकार ने विकास कार्यों के लिए बजट का इंतजाम तो कर दिया लेकिन वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने में आला अफसरों की सुस्ती और धरातल पर काम कराने वाली मशीनरी की आरामतलबी के चलते वर्ष 2013-14 में मंजूर बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो सका।

विभागों ने विकास कार्य न कराकर पैसा सरेंडर कर दिया। इसका खामियाजा सरकार को लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ा।

अफसरों के इस रवैये से खफा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन विभागों के प्रमुख सचिवों से जवाब-तलब किया है जो वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने तथा खर्च कर पाने में फिसड्डी रहे हैं।
विज्ञापन

अगले महीने होगी बैठक

अगले महीने होने जा रही समीक्षा बैठक से पहले इनमें से कुछ अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

2012-13 का बजट खर्च न हो पानेे की वजह से प्रदेश सरकार की खूब किरकिरी हुई थी। इसके बाद सरकार ने नौकरशाही को कसा भी, लेकिन अफसरों के रवैये में कोई सुधार नहीं आया।

लगभग एक दर्जन विभागों के बजट के आंकड़ें इस बात की गवाही दे रहे हैं कि विकास को लेकर सूबे के आला अफसर कितने गंभीर हैं।

बजट खर्च करने को लेकर विभागाध्यक्षों द्वारा बरती गई लापरवाही पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिवों से स्पष्टीकरण मांगा है।

एक साल पहले मिली थी बजट की स्वीकृति

विधानमंडल ने 2013-14 के बजट को वित्त वर्ष की शुरुआत के पहले ही मंजूरी दे दी थी। मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने अप्रैल में ही अफसरों को समयबद्ध तरीके से वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और योजनाओं पर बजट खर्च करने की हिदायत भी दी थी।

मगर कई विभाग बजट की पूरी धनराशि खर्च नहीं कर पाए और विकास का पैसा लैप्स हो गया। इनमें सिंचाई, कृषि, नगरीय रोजगार, भूमि विकास एवं जल संसाधन, उच्च शिक्षा, युवा कल्याण, सूचना प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा खाद्य जैसे अहम विभाग शामिल हैं। कुछ विभागों की योजनाएं तो सीधे जनता से जुड़ी हैं।

शासन के सूत्रों का कहना है कि चुनाव नतीजों के बाद हार के कारणों का मंथन करने में जुटी सरकार की जानकारी में यह तथ्य भी आया है कि वर्ष 2013-14 में तमाम विभागों ने बजट खर्च करने में सुस्ती दिखाई।

इस नाते विकास कार्य और योजनाएं धरातल पर नहीं उतारी जा सकीं। चुनाव में सत्तारूढ़ दल के बारे में नकारात्मक संदेश गया और उसे करारी हार झेलनी पड़ी।
विज्ञापन

2013-14 में आवंटित बजट का ये रहा हाल

विभाग का नाम---बजट स्वीकृतियां (प्रतिशत में)--------बजट खर्च (प्रतिशत में)
सिंचाई (निर्माण कार्य)--------0.02---------59.84
कृषि---------------------------70.47-------91.27
नगर विकास------------------77.22--------99.48
भूमि विकास एवं जल संसाधन--58.59----98.03

परिवहन----------------------72.23---------96.22
वन---------------------------61.26---------94.09
वित्त (सामूहिक बीमा)--------14.52---------99.01
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी--------47.94--------105.32
समाज कल्याण (एससी)-----79.95---------95.33

संस्कृति----------------------54.12----------88.17
खाद्य एवं रसद---------------50.18---------583.41
उच्च शिक्षा-------------------81.82---------96.10    
स्वास्थ्य (सार्वजनिक)--------73.60--------88.50   
स्रोत: कोषवाणी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें