मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुधवार को पुलिस लाइन मैदान में केंद्र सरकार पर हमलावर नजर आए। सीएम ने केंद्र के विकास के दावों को खारिज करते हुए कहा कि हम उनसे ज्यादा और तेज विकास कर रहे हैं। आम बजट से अब लोग यूपी के बजट की तुलना करने लगे हैं।
कहा कि वे घाटों को वाई-फाई कर रहे हैं लेकिन उससे नावें नहीं, लैपटॉप और कंप्यूटर ही चलते हैं। सरकार अगले दो साल में किसानों और बेरोजगारों की खुशहाली के लिए काम करेगी। पुलिस भर्ती के नतीजे अप्रैल में घोषित कर दिए जाएंगे और नई भर्ती शुरू की जाएगी।
भारत नेपाल मैत्री बस, लोहिया ग्रामीण बसों को रवाना करने और लैपटाप, टूल किट, साइकल और समाजवादी पेंशन का वितरण करने के बाद मुख्यमंत्री ने 20 मिनट तक लोगों को संबोधित किया।
जनता को बहकाना आसान, समझाना कठिन
इस दौरान अखिलेश ने भाजपा और नरेंद्र मोदी का नाम तो नहीं लिया लेकिन बार-बार यह जताने की कोशिश करते रहे कि प्रदेश की सरकार केंद्र से ज्यादा तेजी से काम कर रही है। जनहित के कार्यों को गिनाते हुए कहा कि लोगों को बहकाना आसान है, समझाना कठिन।
कहा कि बनारस में सारनाथ और घाटों को 24 घंटे बिजली दी जा रही है और 2016 तक गांवों को 16 और शहरों को 22 से 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जाएगी। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के साथ बाबतपुर-भदोही और बनारस-सोनभद्र हाईवे भी बना रहे हैं।
भदोही से मिर्जापुर के बीच की सड़क हमेशा खराब हो जाती है, हम उसे फोर लेन सीसी रोड बनवा रहे हैं। बनारस सहित चार शहरों में छह माह में मेट्रो की डीपीआर तैयार हो जाएगी।
अखिलेश ने कहा, ‘जितनी भी योजनाएं चल रही हैं, वे जनता को जोड़ने के लिए चलाई जा रही हैं। कोई राज्य सरकार अपने संसाधन समाजवादी पेंशन जैसी बड़ी योजना नहीं संचालित कर रही है। इसके तहत हमने महिलाओं के हाथों में धन देकर उनका मान बढ़ाया है।
तीन लाख में बनवा रहे लोहिया आवास
आवास के लिए केंद्र से 70-75 हजार रुपये देती है लेकिन हम तीन लाख से लोहिया आवास बनवा रहे हैं। हम श्रमिकों को कुशल बनाने के लिए साइकल और टूल किट दे रहे हैं तो युवाओं को सूचना संपन्न बनाने के लिए लैपटाप।’
समारोह में परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र प्रसाद चौधरी, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन यादव, परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक मुकेश मेश्राम ,कमिश्नर आरएम श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
पड़ोसी देशों से बेहतर हों रिश्ते
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी हमेशा पड़ोसी देशों से बेहतर रिश्तों के हिमायती रहे हैं। उन्होंने यह काम केवल सरकारों के प्रयास से नहीं हो सकता है। यह तभी होगा जब दोनों देशों में आवाजाही और व्यापार बढ़े।
भारत नेपाल मैत्री बस सेवा का प्रस्ताव जब केंद्र सरकार ने दिया तो हमने सहर्ष स्वीकार कर लिया और उसे अंजाम तक पहुंचा दिया है।