यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में शनिवार को 15765 करोड़ के निवेश से स्थापित होने वाली औद्योगिक परियोजनाओं के एमओयू हुए और आवंटन पत्र सौंपे गए।
अखिलेश ने उद्यमियों को इंडस्ट्री लगाने के लिए ऑनलाइन आवेदन व क्लीयरेंस के लिए औद्योगिक शिकायत निराकरण प्रणाली व निवेश मित्र सुविधा का उद्घाटन किया।
अखिलेश के आवास पर अयोजित कार्यक्रम में खुरजा में 1320 मेगावाट की तापीय विद्युत परियोजना की स्थापना के लिए टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के साथ यूपीएसआईडीसी के एमडी मनोज कुमार सिंह ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
5000 लोगों को मिलेगा रोजगार
इसके लिए, यूपीएसआईडीसी 1200 एकड़ जमीन उपलब्ध करा रही है। इसमें 10,270 करोड़ के निवेश की संभावना है। परियोजना के शुरू होने पर करीब 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा। दूसरा एमओयू जगदीशपुर पेपर मिल व यूपीएसआईडीसी के बीच हुआ। अमेठी में स्थापित हो रही इकाई के लिए 187 एकड़ जमीन दी जा रही है।
इसमें 3700 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और 15 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
अखिलेश ने कार्यक्रम में औद्योगिक क्षेत्र उमरदा कन्नौज में 30 एकड़ जमीन पर 105 करोड़ की लागत से मक्का आधारित परियोजना शुरू करने के लिए वरदान इंडस्ट्रीज को आवंटन पत्र दिया।
टिकरिया औद्योगिक क्षेत्र अमेठी में एसीसी कंपनी को विस्तार योजना के लिए तीन एकड़ जमीन दी जा रही है। इनके लिए 200 एकड़ अतिरिक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी।
अखिलेश ने आवंटन पत्र देते हुए बताया कि इस परियोजना पर 650 करोड़ का निवेश होगा।
जरूरी कदम उठा रही सरकार
अखिलेश ने यहां कहा कि सरकार प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। इसकी वजह से माहौल बदला है। कुशीनगर की मैत्रेय परियोजना प्रदेश से बाहर जा रही थी। इसे यूपी में रोका गया और कल इसका शिलान्यास हुआ।
अखिलेश ने कहा कि आज करीब 16 हजार करोड़ की निवेश योजनाओं का आवंटन पत्र व एमओयू समाजवादी सरकार के प्रयासों को सार्थक बना रहा है। सरकार उद्यमियों को किसी भी तरह की समस्या नहीं आने देगी।
अखिलेश ने कहा कि ऑनलाइन क्लीयरेंस सिस्टम इसमें अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि अगर उद्यमियों को कोई दिक्कत है, तो वे सिस्टम के अलावा उन्हें मेल पर भी भेज सकते हैं। इसके लिए उन्होंने अपना ईमेल आईडी भी दिया।
पराग वालों को सिस्टम सुधारना होगा
अखिलेश ने कहा कि अमूल के आने से पराग वालों में नाराजगी है। लेकिन, पराग वालों को अपना सिस्टम सुधारना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को बकाया दूध मूल्य के भुगतान के लिए जो पैसा दिया गया था, उसे विभाग ने कर्मचारियों के वेतन पर खर्च कर दिया।
उन्होंने कृषि उत्पादन आयुक्त को इसकी जांच कराने का निर्देश दिया।