समाजवादी पार्टी और 'साइकिल' के असली मालिक अखिलेश यादव ही हैं। चुनाव आयोग ने सोमवार को साइकिल निशान और पार्टी का नाम अखिलेश के हवाले कर दिया।
पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव को तगड़ा झटका देते हुए चुनाव आयोग ने अपने आदेश में माना कि संगठन के सदस्यों, सांसदों, विधायकों का संख्या बल अखिलेश के साथ है। वहीं, मुलायम ने इस संबंध में हलफनामा भी नहीं भेजा था।
आयोग ने अपने आदेश में अखिलेश खेमे की ओर से दिए गए हलफनामों को सही माना। आयोग ने मुलायम खेमे की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि सपा में कोई फूट नहीं हुई है। आयोग ने दो टूक कहा कि यह फैसला एक जनवरी को सपा के बुलाए गए राष्ट्रीय अधिवेशन की संवैधानिकता को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अखिलेश गुट के पास विधायकों, सांसदों और संगठन के सदस्यों के संख्या बल के आधार पर है।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के सादिक अली मामले को आधार मानते हुए अखिलेश खेमे के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने संख्याबल को आधार मानते हुए फैसला दिया था। आयोग ने कहा कि उसने अपने पूर्व के फैसलों में भी संख्या बल को ही आधार मानकर फैसला दिया है।
संख्या बल अखिलेश के साथ...
205 विधायकों ने पक्ष में दिया हलफनामा, कुल 228 विधायक थे सपा के।
68 विधान परिषद सदस्यों में से 56 अखिलेश के साथ
24 में से 15 सांसद (राज्यसभा/लोकसभा) भी साथ आए
46 में से 28 राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्यों ने भी दिया हलफनामा
5731 डेलीगेट्स में से 4400 सदस्यों ने अखिलेश का समर्थन किया (ये 8 से 10 अक्तूबर, 2014 को राष्ट्रीय सम्मेलन में उपस्थित थे।) (जैसा कि चुनाव आयोग ने बताया)
दो प्रमुख मुद्दे जिन पर आयोग को करना था निर्णय
मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
पहला: क्या ‘निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश’ के पैरा 15 के तहत समाजवादी पार्टी में टूट हो चुकी है?
खुद मुलायम ने मानी टूट
आयोग ने कहा कि 30 दिसंबर को मुलायम ने आयोग को लिखे पत्र में साफ संकेत कर दिया था कि पार्टी में टूट है। राम गोपाल का अधिवेशन बुलाना, इसमें अखिलेश को अध्यक्ष बनाना, मुलायम का अधिवेशन को असंवैधानिक ठहराना और राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अपना दावा करना साफ करते हैं कि पार्टी में विभाजन था।
दूसरा: अगर टूट हो चुकी है तो कौन सा घटक या समूह सपा है?
बहुमत अखिलेश के साथ
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार विवाद की स्थिति में बहुमत के परीक्षण पर निर्णय हो। सपा के अधिवेशन में आए पदाधिकारियों, विधायकों और सांसदों की संख्या स्पष्ट करती है कि बहुमत अखिलेश के साथ है। ऐसे में अखिलेश का समूह ही सपा है। यही पक्ष पार्टी के नाम और साइकिल के निशान का पात्र है।