उधर, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सीट फूलपुर में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ-साथ 10 मंत्री, 7 विधायक और 4 सांसदों ने प्रचार किया था। इनमें खास तौर पर सिद्धार्थनाथ सिंह, रीता जोशी, नंद गोपाल नंदी, आशुतोष टंडन, स्वतंत्रदेव सिंह, गिरीश यादव आदि शामिल थे। वहीं, अखिलेश यादव ने फूलपुर और गोरखपुर में मात्र एक-एक सभा की। इसके अलावा फूलपुर में एक रोड शो किया।
भाजपा के सूत्र बताते हैं कि पार्टी कार्यकर्ता और नेता प्रचार में गए तो, पर जीत के प्रति इतने ज्यादा आश्वस्त थे कि वे पूरे मनोयोग से ‘करो या मरो’ की स्थिति में डोर टू डोर प्रचार अभियान में नहीं जुटे।
वहीं, बसपा कोऑर्डिनेटर्स ने हर गांव और हर कस्बे में मायावती का यह संदेश पहुंचा दिया कि भाजपा को हराने के लिए सपा प्रत्याशी को जिताना है। सपा के एक नेता कहते हैं- सही बात तो यह है कि उनके शीर्ष नेतृत्व को भी यह उम्मीद नहीं थी कि दोनों सीटें उनकी झोली में आएंगी।
चुनाव प्रचार की प्रभावी रणनीति, विपक्ष का वोट न बंटने देने और कम्युनिस्ट जैसे छोटे दलों के कार्यकर्ताओं की पूरी मदद लेने का ही परिणाम है कि सपा को उल्लेखनीय सफलता मिली।