फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अखिलेश पर फूटा किसानों का गुस्सा तो मिला 'भरोसा'

Thu, 07 May 2015 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
न उपज का सही दाम मिल रहा है और न ही नुकसान होने पर बीमा कंपनियों से सहारा। आलू भी सरकार खुद खरीदे, ताकि किसानों को बर्बादी से बचाया जा सके। बुधवार को सूबे के किसानों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कुछ इसी तरह की खरी-खरी सुनाई।
विज्ञापन


जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के किनारे आलू समेत सभी प्रमुख जिन्सों की खरीद-बिक्री के लिए मंडियों का निर्माण होगा। साथ ही स्वीकार किया कि किसानों के लिए जो तय होता है, उसका पूरा लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कृषि राज्यमंत्री राजीव कुमार सिंह, मुख्य सचिव आलोक रंजन समेत शासन के अफसर और कृषि वैज्ञानिक जिला मुख्यालयों पर बैठे किसानों से मुखातिब हुए। पहले वैज्ञानिकों ने मानसून में देरी को देखते हुए किसानों को सूखा सहन कर सकने वाली प्रजातियों की जानकारी दी। फिर मंडलवार किसानों ने समस्याएं रखीं। करीब एक बजे सीएम भी योजना भवन स्थित एनआईसी हॉल पहुंचे।
विज्ञापन


इटावा के शिव प्रसाद मिश्र ने कहा कि एसडीपी पाइप पर बुंदेलखंड में 90 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है, जबकि उनके जिले में यह 50 फीसदी है। कहा जाता है कि जहां ज्यादा नदियां हैं, वहां अनुदान ज्यादा है।

इटावा में तो 9 नदियां हैं, फिर भी अनुदान कम क्यों। जवाब में प्रमुख सचिव (कृषि) अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि सरकार ने हाल ही में एसडीपी पाइप पर अनुदान दोगुना किया है।

अखिलेश बोले, गेहूं के रेट तय कर दिए गए हैं

कन्नौज के महेंद्र कटियार ने कहा, जिले में आलू उत्पादन बहुतायत में होता है। इस बार सभी कोल्ड स्टोरेज फुल हैं। भाव काफी गिर गया है। समझ नहीं आ रहा कि उपज कहां बेचें। इसलिए सरकार को आलू खरीदने की व्यवस्था करनी चाहिए।

इस पर सीएम ने कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के किनारे किसानों के लिए मंडी बनाने का इरादा है। सबसे पहले कन्नौज में आलू की मंडी बनाएंगे। बाद में अनाज, फल, सब्जी और दूध की मंडिया बनेंगी।

सीएम ने कहा, अभी-अभी सिद्धार्थनगर से लौट रहा हूं। वहां किसानों से बात की। गेहूं के रेट तय कर दिए गए हैं, लेकिन इसकी खरीद को लेकर जमीनी स्तर पर तमाम शिकायतें हैं।

इन्हें दूर करने के लिए हरसंभव प्रयास होंगे। उपज का जितना मूल्य तय होता है, अगर उतना किसानों को मिल जाए तो उनकी दशा सुधर सकती है। वहीं, दूसरी ओर सीएम ने कहा कि कई सौ करोड़ रुपये का बीज जारी किया गया है, लेकिन किसानों तक यह नहीं पहुंच पाता।

मुखिया ने स्वीकारा, नहीं मिल रहा वाजिब दाम

सीएम ने कहा कि राजधानी में बहुत ज्यादा महंगाई है, जबकि 20 किलोमीटर दूरी पर दूध भी यहां के मुकाबले सस्ता है। वहां दूसरे कृषि उत्पादों की भी सही कीमत नहीं मिल पाती।

उन्होंने कहा कि किसानों की दशा बदलने के लिए वैज्ञानिक सुझाव दें, अधिकारी उस पर अमल करें। वर्ष 2015 किसान वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों की ओर से आए सुझावों पर अमल करने से ही उन्हें राहत मिलेगी।

बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि मौजूदा दौर में गुणवत्तायुक्त उत्पादों की बेहद जरूरत है। इसे सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिकों की मदद जरूरी है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि ‘आप गांव गोद लें, सुविधाएं हम देंगे।’

इसी तरह से प्रभारी वैज्ञानिक संबंधित जिले में खेती के विकास के लिए जो सुझाव देंगे, उन पर राज्य सरकार अमल करवाएगी। उन्होंने कहा कि यह काम जल्द शुरू होना चाहिए। उम्मीद है कि इसके लिए मुख्य सचिव कोई न कोई रास्ता निकालेंगे।

इस दौरान केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीएन सिंह, अंतरराष्ट्रीय धान शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. तपेंद्र कुमार और केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वीके मिश्रा भी मौजूद रहे।
विज्ञापन

किसानों ने उठाए ये प्रमुख मुद्दे

-मिट्टी की जांच मुफ्त हो
-ग्रीन हाउस पर भी बीमा का लाभ मिले
-पॉली हाउस पर ज्यादा सब्सिडी
-समय से बिजली कनेक्शन
- बकाया गन्ना मूल्य भुगतान जल्द
- गेहूं की क्षतिपूर्ति के लिए शेष मुआवजा राशि जल्द मिले
- सौर उर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप पर सब्सिडी की मात्रा बढ़ाई जाए
- 10-20 दुधारू पशुओं को पालने के लिए मिनी-मिनी कामधेनु डेयरी योजना शुरू हो

आनन-फानन में बुलाए गए उद्यान निदेशक
वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री के आने से पहले किसानों ने ढेर सारे ऐसे मुद्दे उठाए जो उद्यान विभाग से संबंधित थे। प्रमुख सचिव (कृषि) ने इन्हें नोट कर लेने की बात किसानों से कही।

इस पर किसानों ने कहा कि आमने-सामने बात होने पर समस्या का हल नहीं मिल रहा है तो नोट करने से तो राहत मिलने से रही।

इस पर मुख्य सचिव आलोक रंजन ने फौरन उद्यान निदेशक को बुलाने के निर्देश दिए। कुछ ही देर में उद्यान निदेशक एसपी जोशी योजना भवन में पहुंचे। उन्होंने किसानों के सवालों के जवाब दिए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें