रविवार को घंटाघर पर सुबह महिलाओं की संख्या कम दिखी पर विरोध जारी रहा। हाथों में नो सीएए, नो एनआरसी, रिजेक्ट सीएए और बायकॉट एनआरसी जैसी नारे लिखी तख्तियां लिए महिलाएं विरोध करती दिखीं। दोपहर बाद महिलाओं की संख्या बढ़नी शुरू हुई तो घंटाघर के पास का इलाका भीड़ से भर गया। रात में ठंड से बचाव के साधन न होने के बावजूद महिलाएं देशभक्ति के नारों और राष्ट्रगीत के जरिये हौसला बांध रही हैं।
प्रदर्शन में शामिल इरम व सुमैया राना का आरोप है कि पुलिस प्रदर्शन को कमजोर करने पर अड़ी है। कोई पुरुष इसका विरोध करता है तो उसे गिरफ्तार कर ले रही है। बीती रात सालिम नाम के लड़के को पुलिस अपने साथ ले गई। उसे सुबह तक छोड़ा नहीं गया।
दिव्यांग दंपती भी हुए शामिल
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रविवार को वजीरबाग के दिव्यांग दंपती मो. वसीम व उनकी पत्नी तरन्नुम वसीम अब्बास भी घंटाघर अपनी ट्राई साइकिल से पहुंचे। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का उत्साह बढ़ाया।
नागरिकता संशोधन कानून व एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में हिंसा के बाद गत 20 दिसंबर को गिरफ्तार किए गए रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मो. शुएब एक महीने बाद जेल से छूटने के बाद सीधे घंटाघर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं के प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यदि संविधान के खिलाफ कुछ भी गलत होता है तो हम सभी का कर्तव्य है कि उसका विरोध करें। इसका अधिकार हमें देश का संविधान देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को हिंसक बनाने की साजिश जानबूझ कर की गई थी। उन्होेंने कहा कि आज देश की बहन, बेटियाें ने दिखा दिया है कि देश में संविधान का ही राज होगा।
नहीं खुला महिला शौचालय का ताला
ऐतिहासिक घंटाघर पर महिलाओं के जुटने के बाद शुक्रवार से ही बंद पार्क में बने शौचालय का ताला रविवार को भी नहीं खुला। इससे महिलाएं पुरुष शौचालय का इस्तेमाल करने पर मजबूर है। ऐसे में कई बार उन्हें परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है।