सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरा के प्रति प्रशासन तंत्र ने उदासीनता का रवैया अपना लिया है। भाजपा सरकार की संकट से निबटने की इच्छाशक्ति भी कमजोर हो चली है।
अब न तो कोई श्रमिकों की सुरक्षित और सम्मानित ढंग से वापसी में रूचि रही और न ही नागरिकों की जिंदगी-मौत के प्रति संवेदना। भाजपा सरकार प्रदेश के करोड़ों लोगों को उसके भाग्य के भरोसे छोड़कर खुद निश्चिंत होकर राजसुख भोगने में मगन हो गई है।
अखिलेश ने शुक्रवार को बयान में कहा, मुख्यमंत्री जांच और क्वारंटीन सेटरों के बारे में बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन सच यह हैं कि क्वारंटीन स्थल ‘यातना शिविर‘ में तब्दील हो गए है। इनकी हालत बेहद खराब और दयनीय है। अधिकारियों ने तालाबो, पोखरों और उजाड़ जगहों में क्वारंटीन किए जाने वाले श्रमिकों को पशुओं से भी बुरी दशा में रखा जा रहा है।
भाजपा सरकार इसे ही फाइव स्टार व्यवस्था बता रही है। इसके विरोध में कई जगह डाक्टर, नर्स और श्रमिक भी प्रदर्शन कर चुके हैं। अभी तक कोरोना वायरस की बीमारी से लड़ने पर जो व्यय हुआ है उसका ब्यौरा सार्वजनिक होना चाहिए। जनता को यह जानने का अधिकार है कि खर्च कहां हुआ? पैसों का हिसाब किताब क्या है?
बिस्तरों में घुस रहे सांप:
सपा अध्यक्ष ने कहा, सरकार की बदइंतजामी का इससे बड़ा नमूना और क्या होगा कि वीवीआईपी जिले गोरखपुर के सहजनवां ब्लाक में क्वारंटीन सेंटर में एक प्रवासी श्रमिक के बिस्तर में सांप घुस गया। किस्मत अच्छी थी कि वह जिंदा बच गया। कुछ दिन पहले गोंडा में एक स्कूल में बने क्वारंटीन सेंटर में 16 साल के एक लड़के की सांप काटने से मौत हो गई। इन सेंटरों में घटिया खाना दिए जाने के साथ ही स्टाफ के को समय से हाजिर न होने की भी शिकायतें आम है। प्रशासनिक पंगुता व शिथिलता के चलते लोग अब निजी क्वारंटीन केंद्रों का रुख कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण की जांच रिपोर्टों को लेकर भी विवाद होते रहते हैं। लोगों की जिंदगी के साथ यह सरकार जैसा खिलवाड़ कर रही है, वह दुखद और अमानवीय है।
श्रमिकों का संघर्ष अभी खत्म नहीं:
सपा अध्यक्ष ने कहा, श्रमिकों का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। यह अस्तित्व की लड़ाई है तथा लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने वाला है। सरकार चालाकी से बसों की बहस चलाए रखना चाहती है, जबकि बसों का विवाद निरर्थक है। इसे बस करना चाहिए, हजारों श्रमिक दूसरें राज्यों और सीमाओं में अभी भी फंसे हुए है। उनके बारे में प्रदेश सरकार संवेदनशील नहीं है। शुक्रवार को ही खबर है कि यूपी व मध्य प्रदेश की सीमा पर अमझराघाटी पर मेहनतकशों का सैलाब बढ़ता जा रहा है। दोनों राज्यों की भाजपा सरकरों ने मजदूरों को धोखा देने और प्रताड़ित करने का काम किया है।