यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने परोक्ष रुप से बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि राजनीति में उन लोगों से बचकर रहने की जरूरत है जिनके एजेंडे में चालूपन और होशियारी भरी पड़ी है।
यह बात उन्होंने अपने आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। बुधवार को अपने सरकारी आवास पर हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में उर्दू विषय में हर जिले में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले 189 छात्र-छात्राओं को 5100 रुपये का चेक, स्मृति चिह्न और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
इस मौके पर उन्होंने बीजेपी पर सीधी टिप्पणी तो कोई नहीं की लेकिन इशारों ही इशारों में उन्होंने अपनी पूरी बात कह दी।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि 'चालू' और 'होशियार' लोग नए-नए मुद्दे लाते हैं। वे सरकार की योजनाओं से ध्यान हटाकर उनका दिमाग दूसरी तरफ लगाना चाहते हैं।
छह माह पहले कुछ और मुद्दा थे, अब दूसरे हैं। भले की केंद्र सरकार मेक इन इंडिया, स्वच्छता, डिजिट इंडिया की बात कर रही हो लेकिन यूपी में मुद्दे अलग हैं। उन्होंने कहा कि असली सत्ता यूपी से होकर जाती है।
आने वाले चुनाव में तय होगा किसकी सरकार बनेगी। एक तरफ सेकुलर और सोशलिस्ट हैं, जो जोडऩे की बात करते हैं, हिंदी-उर्दू का सम्मान करते हैं और दूसरी तरफ वे लोग हैं जिनका विकास से कोई मतलब नहीं है।
मिलेंगे उर्दू टॉपरों को भी लैपटॉप
परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर छात्र-छात्राओं से उन्होंने कहा कि भविष्य उनका है। आज वह सम्मान कर रहे हैं, हो सकता है कल पूरा देश उनका सम्मान करे।
उन्होंने उर्दू के टॉपरों को लैपटॉप देने की भी घोषणा भी की। उन्होंने दादरी कांड को लेकर आजम खां के यूएनओ जाने का जिक्र तो नहीं किया लेकिन इशारों ही इशारों में देश के अंदरूनी मामलों का समाधान खुद ढूंढने पर जोर दिया।
अखिलेश ने कहा कि समाजवादी कितना भी अच्छा काम करें, कुछ लोग कमी जरूर निकालते हैं। कुछ लोग बदायूं कांड को कहां तक ले गए ? किस मौके पर और किस जगह पर उन्हें जवाब नहीं देना पड़ा ? सच्चाई क्या निकली ?
घटना दुखद थी लेकिन उन संस्थाओं को सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए थी, जो इसे लेकर दूर तक गए। उन्होंने कहा कि देश की अंदरूनी बातों का समाधान खुद ढूंढना पड़ेगा। दुनिया के बराबर खड़ा होने के लिए बड़े दिल का होना पड़ेगा। कुछ चीजों को भूलना पड़ेगा।
सीएम ने कहा कि हिंदी और उर्दू देश को जोड़ती हैं, ये आजादी की लड़ाई की भाषाएं हैं, गरीब, किसानों, मजदूरों की भाषाएं हैं। देश की तरक्की मातृभाषा के सम्मान से हो सकती है।