मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में हुए सांप्रदायिक दंगों में 47 मौतें हुईं, दहशत और नफरत की आग के शोले भी बुझ चुके हैं।
अब मौतों का सिलसिला थम सा गया है और मातम की चीखें भी राजनीतिक भाषणबाजी के बोझ तले सिसकियां भर रही हैं।
इस दौरान, अचानक अखिलेश सरकार को सौहार्द और इंसानियत की याद आई है।
रविवार को मुजफ्फरनगर में काले झंडे और लोगों का गुस्सा देखकर लौटे अखिलेश ने सोमवार को विज्ञापन के जरिए इंसानियत की दलील देते हुए सौहार्द और प्रेम की बात कही है।
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने भी एक विज्ञापन जारी करते हुए जनता से अफवाहों पर यकीन न करने की अपील की है।
अखिलेश के इस विज्ञापन में भले ही उनकी तस्वीर न हो, लेकिन ढलते सूरज और लालिमा लपेटे आसमान पर अखिलेश के हस्ताक्षर लिए हुए एक संजीदा और इमोशनल अपील जरूर है।
'इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं' शीर्षक से प्रकाशित किए गए इस विज्ञापन में अखिलेश की ओर से लिखा गया है, 'प्रदेश की जनता को आश्वस्त किया जाता है कि सरकार प्रदेश में शांति और सद्भावना बनाए रखने हुए कटिबद्ध है। सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले व हिंसात्मक कृत्यों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाएगी।'
दूसरी तरफ, पुलिस महानिदेशक की तरफ से जारी की गई इस अपील में एमएमएस, वीडियो क्लिप, सीडी और सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए वायरल होने वाली अफहावों से सतर्क रहने को कहा गया है।
इसमें यह भी कहा गया है कि असामाजिक तत्वों की सूचना देने वाले को एक लाख रुपए और इनकी गिरफ्तारी कराने वालों को पांच लाख रुपये का ईनाम दिया जाएगा।
गौरतलब है कि बीते दिनों यूपी पुलिस के डीजीपी देवराज नागर की ओर से चेतावनी भरे मैसेज भी भेज गए थे। इसमें दो लड़कों की हिंसक हत्या के वीडियो को शेयर न करने की चेतावनी दी गई थी।
इस अपील में कुछ नंबर भी दिए गए हैं, जिन पर सही जानकारी दी जा सकती है।