शामली जिले की थानाभवन सीट से अखिलेश की अगुवाई वाली सपा ने किरनपाल कश्यप को उम्मीदवार बनाया है। रालोद से गठबंधन हुआ तो यह सीट उसके खाते में चली जाएगी। ऐसा हुआ तो किरनपाल का क्या होगा?
थानाभवन तो महज एक उदाहरण भर है, प्रदेश की कई सीटों पर ऐसी स्थिति है। यही वजह है कि दल के नाम, सिंबल व गठबंधन को लेकर अनिश्चितता से अखिलेश खेमे में अब बेचैनी बढ़ने लगी है।
पहले चरण में 15 जिलों की 73 सीटों पर मंगलवार से नामांकन शुरू हो जाएंगे। पर, अब तक तय नहीं है कि अखिलेश की अगुवाई वाली सपा कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी और रालोद व कांग्रेस के लिए कितनी सीटें छोड़ी जाएंगी।
गठबंधन होने की स्थिति में कांग्रेस व रालोद ऐसी कई सीटों पर दावा करेंगे जिनपर अखिलेश प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं। सबसे ज्यादा बेचैनी सपा के ऐसी सीटों के उम्मीदवारों में ही है। सपा (अखिलेश) के घोषित उम्मीदवारों को भी नहीं पता कि उनके टिकट कटेंगे या बचेंगे।
कुछ विधायकों के टिकटों पर भी कैंची चलने की संभावना है। ऐसी चर्चा है कि गठबंधन की घोषणा के साथ ही अखिलेश पहले और दूसरे चरण में मतदान वाले जिलों के प्रत्याशियों की नई सूची जारी कर सकते हैं।