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'गप्पे लड़ाते हैं पर जनता को वक्त नहीं देते अफसर'

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हफ्ते भर पहले उत्तर प्रदेश के आईएएस अफसरों और इंजीनियरों को आड़े हाथों लेने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शनिवार को भी उसी तेवर में नजर आए। कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में वे अचानक पहुंचे और सूबे के आला अफसरों को खरी-खरी सुनाई।
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उन्होंने कहा, अफसरों के पास नेताओं के साथ गप्पे हांकने का तो वक्त है, पर जनता के लिए वक्त नहीं है। कोई अफसर अगर सपा नेताओं को 10 मिनट टाइम देता है और दूसरों को नौ मिनट, तो उन्हें कोई ऐतराज नहीं है। पर, जनता की सुनवाई न होना गलत है। जिस समीक्षा बैठक में सीएम ने अफसरों की क्लास ली, उसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव आलोक रंजन कर रहे थे।

इसमें सूबे के सभी मंडलायुक्त, डीएम व सीडीओ जैसे अफसर शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो अफसर काम नहीं करते हैं, अगर उनका निलंबन नहीं कर सकते तो उनका वेतन काटिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था सरकार की पहली प्राथमिकता है। कहीं भी सांप्रदायिक फसाद हुआ तो डीएम और एसपी पर सीधे कार्रवाई होगी।
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बोले - सब पता है, किस बिल्डिंग में कैसी ईंट लग रही है

कानून व्यवस्था पर बुलाई गई बैठक सुबह 10 बजे शुरू हुई। करीब 11 बजे बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के सीएम वहां पहुंचे। वह 25 मिनट तक वहां रहे और अफसरों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। सीएम ने कहा, मुझे हर अधिकारी के बारे में पता है कि वह कहां क्या कर रहा है?

किस विभाग में क्या हो रहा है, यह भी पता है। किस बिल्डिंग में कैसी ईंट लग रही है, इसकी भी जानकारी है। किस विभाग ने कितनी वित्तीय स्वीकृतियां जारी कीं और कौन-कौन से फैसले लिए, सब पता है। यह भी पता है कि शनिवार और रविवार को तमाम अफसर गायब हो जाते हैं।

इतनी आजादी में भी काम नहीं कर पा रहे तो कभी नहीं कर पाएंगे
विधान भवन में आयोजित बैठक में सीएम ने कहा, मेरी सरकार ने अफसरों को काम करने की पूरी आजादी दी है। अगर इसके बाद भी वे काम नहीं कर पाते हैं, तो कभी नहीं कर पाएंगे। अब तो जनता तक को मालूम रहता है कि कौन सा अधिकारी कैसा काम कर रहा है? अब किसी भी बात को छुपाना संभव नहीं है। ऐसे में कहीं भी लापरवाही के गंभीर नतीजे होंगे।

अखिलेश बोले, ‘जैसा व्यवहार आप (अफसर) अपने अधीनस्थों से करते हैं, यदि वैसा ही मैं आपके साथ करूं तो कैसा लगेगा?’
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विकास कार्यों पर न पड़े पंचायत चुनाव का असर

मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देशित किया कि पंचायत चुनाव का असर विकास कार्यों पर नहीं पड़ना चाहिए। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य के काम होते रहने चाहिए।

उन्होंने समाजवादी पेंशन का लाभ पात्रों तक पहुंचाने का निर्देश दिया। सूबे में पंचायत चुनाव महीनों तक चलने हैं और चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके बाद नए काम शुरू नहीं हो पाएंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री का निर्देश बहुत महत्वपूर्ण है।

तत्काल जारी करें वित्तीय स्वीकृतियां
मुख्यमंत्री ने शासन के प्रमुख सचिवों व सचिवों को दो टूक कहा कि उनके काम का मूल्यांकन विकास एजेंडे का क्रियान्वयन होगा।

उन्होंने शासन के अफसरों को हर दो महीने में आवंटित जिले का भ्रमण कर विकास व जनकल्याणकारी योजनाओं का मौका पर जायजा लेने और इसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने 2015-16 की वित्तीय स्वीकृतियां तत्काल जारी करने का निर्देश दिया।
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