प्रदेश के एक माननीय एक दिन सचिवालय के एक अनुभाग में गए। माननीय अकेले नहीं बल्कि समर्थकों की पूरी फौज के साथ पहुंचे थे।
वे कई मामलों की जानकारी मांग रहे थे। जब पूरी जानकारियां नहीं मिलीं तो तैश में आकर समर्थकों से बोले, अखिलेश से बात कराओ।
...और फिर माननीय की अखिलेश से बात शुरू हो गई। अब तो अनुभाग के सभी कर्मियों के होश उड़ने लगे...। उन्हें लगा कि माननीय ने पूरे अनुभाग को ही ‘बुक’ कराने का इंतजाम कर दिया है।
बात खत्म होने के बाद कर्मियों की जान में जान तब आई जब उन्हें पता चला कि माननीय सूबे के मुख्यमंत्री से नहीं, किसी दूसरे अखिलेश से बात कर रहे थे।
बात भी विभाग के बजाय दूसरी चीजों की हो रही थीं...। माननीय के जाते ही अनुभाग कर्मियों ने चैन की सांस ली और कहा-इस सरकार में तो पता ही नहीं चलता कि किसके तार कहां से जुड़े हैं...। सभी आकर नेताजी व सूबे के मुखिया की ही धमकी देते हैं।
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