जिस कमजोरी को लेकर आम चुनाव में भाजपा अखिलेश सरकार पर हमलावर रही, अखिलेश उस पर ही बात करेंगे।
चुनावी नतीजों के बाद राज्य सरकार एक बार फिर विकास व कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 10 जून को समीक्षा करने जा रहे हैं।
इसमें शासन के आला अधिकारियों के साथ-साथ सभी कमिश्नर, डीएम व पुलिस कप्तान तलब किए गए हैं।
बैठक के मद्देनजर जिलावार अधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कराया जा रहा है। इसके आधार पर मुख्यमंत्री अफसरों के पेंच कसेंगे।
हो सकती है कार्रवाई
सरकार की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने वाले अफसरों पर गाज भी गिर सकती है। चुनाव नतीजों के बाद राज्य सरकार गवर्नेंस को लेकर खासी गंभीर हो गई है।
चुनाव नतीजों से साफ हो गया है कि विकास एजेंडे और कानून-व्यवस्था को लेकर जनता के बीच अच्छा संदेश नहीं गया है।
जिन जिलों में चुनाव के दौरान अपराध व कानून-व्यवस्था मुद्दा बने व जिन जिलों में विकास कार्यों को मुद्दा बनाया गया, उनसे उन्हीं मुद्दों पर जवाब मांगा जाएगा।
हालांकि, बैठक में डीएम-कप्तान से लेकर मंडलायुक्त, डीआईजी रेंज व आईजी जोन तक के अधिकारियों को बुलाया जा रहा है लेकिन सरकार की कसौटी पर जिलों में तैनात अफसर होंगे।
जवाब लिया जाएगा अफसरों से
गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार चुनाव के नतीजों को भी सामने रखकर अफसरों से जवाब तलब हो सकता है। जिन जिलों में सपा को करारी शिकस्त मिली है, उनसे संबंधित अफसरों से इसके कारणों की जानकारी ली जाएगी।
जिन जिलों में चुनाव के दौरान भी अपराध की घटनाएं हुईं और जहां पिछले दिनों हिंसक संघर्ष हुए ऐसे जिलों के अफसरों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
इस समीक्षा बैठक में अफसरों को कुछ ऐसे संकेत दिए जा सकते हैं, जिससे बाकी अफसरों के बीच भी कड़ा संदेश जाए।
हाल ही दो आईपीएस अफसरों को सस्पेंड करके सरकार ने यह तो साफ कर ही दिया है कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर फिलहाल वह किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।