यह शायद चुनावी मौसम का असर है कि सरकार को गरीबों की चीनी की याद आ गई है। पिछले कई महीनों से पटरी से उतरी चीनी वितरण व्यवस्था को फिर से ढर्रे पर लाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
सरकार ने सभी सहकारी मिलों से पूर्व निर्धारित कोेटे के अनुसार जिलों को चीनी आवंटित करने का निर्देश दिया है। जिलों को इस चीनी का समय से उठान कराकर रोस्टर (निर्धारित समय सीमा) के अनुसार वितरित कराने का निर्देश दिया है।
इसके लिए 33013 टन चीनी आवंटित कर दी गई है। प्रदेश में सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवारों को ही प्रतिमाह चीनी मिलती है। कई जिलों में अक्तूबर से चीनी वितरण का काम अस्त-व्यस्त चल रहा है।
न तो समय से चीनी पहुंच रही थी और न पूरा कोटा ही मिल रहा था। दिवाली पर भी कई जिलों को समय से चीनी नहीं मिल पाई।
कई बार निर्धारित समय सीमा (रोस्टर) बढ़ाने के बावजूद चीनी वितरण का काम पटरी पर नहीं आ पाया। कई जिलों को दिसंबर की चीनी अभी तक नहीं मिल पाई है।
सरकार को अब इसे दुरुस्त करने की चिंता हुई है। इसके पीछे मुख्य वजह आगामी लोकसभा चुनाव को माना जा रहा है।
सूबे में गरीबी रेखा से नीचे और गरीबों में गरीब (अंत्योदय श्रेणी) 1.6 करोड़ परिवार सस्ती चीनी पाने के हकदार हैं। सरकार आशंकित है कि चीनी न मिलने से इन परिवारों की नाराजगी उसे चुनाव में भारी पड़ सकती है।
शायद इसीलिए उसे तीन महीने बाद सभी जिलों में चीनी वितरण ठीक करने की चिंता सता रही है। मिलों से सभी जिलों को उसके निर्धारित कोटे की चीनी आवंटित कर दी गई है।
पीसीएफ को ब्लॉक गोदामों तक इसे पहुंचाने और उसका समय से कोटेदारों द्वारा उठान कराने की हिदायत दी गई है। खाद्य आयुक्त अर्चना अग्रवाल ने प्पीसीएफ के प्रबंध निदेशक को जिलावार चीनी आवंटन का ब्यौरा संलग्न करते हुए जल्द से जल्द चीनी पहुंचाने को कहा है।