राज्य सरकार ने केंद्र से प्रदेश के सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बिजलीघरों को पर्याप्त कोयले की आपूर्ति कराने का अनुरोध किया है।
प्रदेश के निर्धारित बिजली कोटे में बढ़ोतरी के साथ ही सूबे में दो नए परमाणु उर्जा संयंत्र व अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट लगाने तथा नई परियोजनाओं को जल्द से जल्द पर्यावरणीय मंजूरी दिलाने व कोल लिंकेज की व्यवस्था करने की मांग भी केंद्र सरकार से की गई है।
नई दिल्ली में मंगलवार को राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र बाजपेई ने ये मांगे रखीं।
उन्होंने कहा कि बीते तीन माह में प्रदेश के सभी बिजलीघरों को आवश्यकतानुसार कोयले की आपूर्ति न होने से उत्पादन पर असर पड़ा है। कोयले की कमी के कारण एनटीपीसी की इकाइयां भी ठप हो गई हैं तथा कुछ इकाइयां क्षमता से काफी कम उत्पादन कर रही हैं। इससे गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है और इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है।
बढ़ाया जाए यूपी का कोटा
बाजपेई ने प्रदेश में बिजली उपलब्धता बढ़ाने व 2016-17 तक ग्रामीण क्षेत्रों को कम से कम 18 घंटे तथा शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि केंद्रीय परियोजनाओं से उत्पादित बिजली में यूपी का कोटा बढ़ाया जाए।
पश्चिमी क्षेत्र से उत्तरी क्षेत्र में बिजली ट्रांसमिशन के लिए पावर ग्रिड की ओर से बनाई जा रही लाइनों को जल्द पूरा किया जाए। प्रदेश की सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए पर्याप्त कोयले की व्यवस्था की जाए।
नई परियोजनाओं की पर्यावरणीय स्वीकृति व कोल लिंकेज की व्यवस्था शीघ्रता से की जाए। प्रदेश में कम से कम दो नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएं। वितरण कंपनियों की वित्तीय पुनर्गठन योजना को राज्य सरकार द्वारा पूर्व में दिए गए सुझावों के अनुसार पुनरीक्षित किया जाए।
प्रदेश में अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट की स्थापना का काम शीघ्रता से किया जाए। वित्तीय पुनर्गठन योजना के दायरे में आने वाले राज्यों को ऋणों पर ब्याज के लिए अनुदान दिया जाए।
बिजली आवंटन नीति में हो बदलाव
बाजपेई ने कहा कि जनसंख्या की दृष्टि से यूपी देश का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन केंद्र से प्रदेश का जो कोटा तय किया गया है, वह नाकाफी है। दिल्ली की आबादी यूपी से आधी से भी कम है, लेकिन इसे यूपी के लगभग 70 प्रतिशत के बराबर बिजली आवंटन किया गया है।
महाराष्ट्र को भी यूपी से ज्यादा आवंटन किया गया है। कई राज्य अक्सर अपनी अतिरिक्त बिजली एनर्जी एक्सचेंज में बेचते हैं, जिसे यूपी एवं कमी वाले अन्य राज्यों को 7 से 10 रुपए प्रति यूनिट तक की दर से खरीदना पड़ता है।
ऐसे में केंद्रीय परियोजनाओं से राज्यों को बिजली आवंटन की नीति में बदलाव जरूरी है। इस संबंध में हाल ही मुख्यमंत्री ने पत्र द्वारा प्रधानमंत्री से अनुरोध भी किया है।
इसके अलावा बाजपेई ने प्रदेश को आवंटित कोल ब्लॉक से खनन में आ रही बाधाओं को दूर कराने, घाटमपुर परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी दिलाने, अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट के लिए एटा व फीरोजाबाद में चिह्नित भूमि का सर्वे कराने तथा ग्रामीण विद्युतीकरण समेत केंद्र से संबंधित अन्य मुद्दों को भी उठाते हुए शीघ्रता से कार्रवाई का अनुरोध किया।