अखिलेश यादव ने यूपी के 2014-15 के बजट में अपने ड्रीम प्रोजेक्ट का भी ख्याल रखा। इसके लिए उन्होंने 3,280 करोड़ रूपये आवंटित किए।
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राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित प्रोजेक्ट के लिए खजाना खोल दिया है। एक ओर जहां आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे शीघ्र पूरा करने के लिए पैसे का बंदोबस्त किया गया है वहीं अवस्थापना सुविधाओं में सड़क, पुल, सिंचाई व ऊर्जा के विकास व रखरखाव पर 49,108 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पिछले साल से 82 फीसदी ज्यादा है।
मुख्यमंत्री अपने ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहते हैं, जिसके लिए उन्होंने बजट में 3280 करोड़ रूपये का प्रावधान किया।
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नहीं मिल रहे थे निवेशक
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने निवेशक नहीं मिलने पर इस प्रोजेक्ट को खुद के दम पर आगे बढ़ाने का फैसला किया था। लेकिन एक बड़ी रकम की जरूरत इसके आगे बढ़ाने में अड़चन पैदा कर रही थी।
बावजूद इसके सरकार ने 2013-14 के लेखानुदान में इसके लिए 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। लेकिन इस बार बेरोजगारी भत्ता व लैपटाप पर खर्च होने वाली रकम बची तो इस प्रोजेक्ट के लिए एकमुश्त 3,280 करोड़ रुपये जुटाने में कोई मुश्किल नहीं आई। उम्मीद की जा रही है कि अब इस एक्सप्रेस वे का काम तेजी से पूरा हो सकेगा।
वहीं सरकार ने दूसरी महत्वाकांक्षी परियोजना लखनऊ मेट्रो रेल को समय से पूरा करने की ओर कदम बढ़ाते हुए इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 95 करोड़ रुपये का भी आसानी से प्रावधान कर लिया।
रख रखाव के लिए 15,100 करोड़ रूपये
यही नहीं सरकार ने गांवों के संपर्क मार्गों के विकास के लिए सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामशरण दास के नाम पर एक नई ग्राम सड़क योजना भी शुरू करने का रास्ता निकाल लिया।
बजट में इसके लिए 50 करोड़ की व्यवस्था की गई है। आगे इस पर रकम बढ़ने का रास्ता खुला हुआ है। इसके अलावा जर्जर सड़कों, संपर्क मार्गों व पुलों की कमी पूरी न कर पाने का चुनाव में खामियाजा भुगत चुकी सरकार ने सड़कों-पुलों व संपर्क मार्गों के निर्माण के लिए 15,100 करोड़ रुपये का ठोस बंदोबस्त किया है।
मरम्मत के लिए भी 2,492 करोड़ रुपये उपलब्ध हो गए हैं। अभी लखनऊ में आईटी सिटी बनवा रही सरकार ने आगरा में भी आईटी सिटी व अन्य स्थानों पर आईटी पार्क की स्थापना को बढ़ावा देने का साहस जुटाया है।
इस योजना से होगा बड़ा बदलाव
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित सबसे बड़ी परियोजना दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरीडोर व ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर को पूरा तवज्जो देने की बात कही गई है।
डीएमआईसी से सूबे के 12 जिलों के 36 हजार वर्ग किमी. क्षेत्र का विकास होगा। दोनों तरफ 250 किमी. के क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र व परिक्षेत्र विकसित होंगे।
प्रदेश सरकार ने केंद्र से ईडीएफसी के समानांतर भी औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने का फैसला कराया है, जिसका प्रदेश की बड़ी आबादी को फायदा होगा।
ये भी सरकार की प्राथमिकताओं में आईटी सिटी, आईआईआईटी, विश्व स्तरीय कैंसर संस्थान, मेडिसिटी व अन्य चिकित्सा सुविधाएं, सुपर स्पेशिएलिटी हास्पिटल व कार्डियोलाजी सेंटर, दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट और प्रशासनिक प्रशिक्षण अकादमी