सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि किसी एक की सत्ता का अहंकार व अभिमान सच्चे साधु-संतों के मान-सम्मान से बड़ा नहीं हो सकता है। जो अपने लिए भूमि पर स्थाई कब्जा करके बैठे हैं, वे धर्म के काम के लिए किसी और को अस्थायी भूमि तक आवंटित नहीं करना चाहते हैं। ये सदियों से चली आ रही परंपरा का घोर अपमान है।
अखिलेश ने कहा कि कुंभ और माघ मेले की ये स्वस्थ परंपरा रही है कि इस पुण्य कार्य के आयोजन के लिए अधिकारी साधु-संतों का आशीर्वाद लेते हैं, लेकिन भाजपा राज में हालात ये हो गए हैं कि साधु-संतों को अधिकारियों के आगे जमीन पर लेटकर गिड़गिड़ाना पड़ रहा है, वो भी किसी व्यक्तिगत नहीं बल्कि धर्मार्थ कार्य के लिए।