अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद शहरी नक्सलवाद के खिलाफ जंग छेड़ेगी। विश्वविद्यालयों में सरकार से मोटी तनख्वाह लेकर युवाओं को गुमराह कर नक्सलवाद की ओर धकेलने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
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अभाविप की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष डॉ. नागेश ठाकुर ने सोमवार को यहां यह बात कही। वह बक्शी का तालाब स्थित एसआर कॉलेज में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे।
डॉ. ठाकुर ने कहा, देश में फिलहाल सबसे ज्यादा खतरा शहरी नक्सलवाद से है। दिल्ली सहित अन्य स्थानों पर बड़े विश्वविद्यालयों में बैठे लोग युवाओं को भ्रमित कर नक्सलवाद की तरफ धकेल रहे हैं। सुकमा हमले के आरोप में छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार नक्सली पोडियन पांडा ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिता सुंदर और टीआईएसएस के पूर्व प्रोफेसर बेला भाटिया का नक्सलियों से संबंध उजागर किया है।
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पांडा ने पुलिस को बताया है कि नंदिता और बेला ने बस्तर में बैठकर नक्सलवाद के विचार को किस तरह पुनर्स्थापित किया। उन्होंने कहा, विद्यार्थी परिषद नंदिता सुंदर को डीयू से निष्कासित करने की मांग कर रही है। हम सब नक्सलवाद को उखाड़ फेंकने के लिए काम करेंगे।
अल्पसंख्यक विद्यालयों में भी लागू हो शिक्षा का अधिकार
- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी, सशक्त विदेश नीति और घोटाला मुक्त शासन से विश्व में भारत का महत्व बढ़ा है। भारत शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। युवा सकारात्मक सोच के साथ कैसे अपनी भूमिका निभा सकते हैं, इस दिशा में भी परिषद काम कर रही है।
सामाजिक कुरीतियां, पर्यावरण, पानी की समस्या सहित अन्य मुद्दों पर युवाओं को योगदान देना होगा। भाषाई और अल्पसंख्यक विद्यालयों में भी शिक्षा के अधिकार कानून को लागू कराने के लिए परिषद मांग कर रही है।
डॉ. ठाकुर ने कहा, कृषि शिक्षा को भारत केन्द्रित बनाने की दिशा में विद्यार्थी परिषद लगातार प्रयास कर रही है। मेडिकल क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा, आईआईटी में थिंक इंडिया जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय कार्यसमिति में यूजीसी की भूमिका व उसमें सुधार, मेडिकल शिक्षा, पश्चिम बंगाल व केरल में राजनीतिक हिंसा, यूपी की स्थिति, मौजूदा राष्ट्रीय हालात और जीएसटी पर भी चर्चा होगी। बैठक में राष्ट्रीय कार्यसमिति की पिछली बैठक के मिनट्स का अनुमोदन किया गया।
राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आम्बेकर ने परिषद की वर्षभर की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कहा कि 70 वर्ष की विचार यात्रा में अनेक त्याग व तप से विद्यार्थी परिषद इस मुकाम पर पहुंची है। संगठन को मजबूत कर आगे बढ़ाना सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है।
डॉ. नागेश ठाकुर ने कहा, परिषद शुरू से ही शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ है। सभी को गुणवत्तापूर्ण सस्ती शिक्षा सुलभ हो, इसके लिए सभी सरकारों को प्रयास करना चाहिए लेकिन इस दिशा में अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं हुआ। सरकारों ने सहयोग नहीं दिया।
सीएम योगी को दिया 33 सूत्री मांगपत्र
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री विनय बिद्रे ने बताया कि हमने योगी सरकार के समक्ष 33 सूत्री मांग पत्र रखा है। इसमें महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप छात्रसंघ चुनाव और सभी के लिए सस्ती व सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग प्रमुख है।
उन्होंने कहा, शिक्षा परिसरों में देश विरोधी तत्व, परिसर में संघर्ष, शैक्षिक योजना, संगठनात्मक विकास, सदस्यता अभियान, मीडिया, सोशल मीडिया, छात्रसंघ चुनाव, प्रकाशन, पर्यावरण, राष्ट्रीय सुरक्षा आदि विषय एजेंडे में शामिल हैं।