वेस्ट यूपी में जनाधार रखने वाले चौधरी अजित सिंह की मुसीबतें कम नहीं हो रहीं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मुजफ्फरनगर-शामली के दंगों ने उनके बेस वोट को हिलाकर रख दिया।
चुनावी समीकरण भी खासा प्रभावित हुआ है। अब उनके सांसद पुत्र गांव-गांव घूमकर लोगों की नाराजगी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि बहुत असर होता नहीं दिख रहा। उम्मीद थी, केंद्रीय सेवाओं में जाटों को आरक्षण मिलने पर वोट बैंक की नाराजगी दूर हो जाएगी।
आरक्षण पर विचार के लिए मंत्रिसमूह की बैठक से उम्मीदें भी जगीं, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका।
दिल्ली, राजस्थान समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लग जाने से रही-सही उम्मीदें भी टूट गईं।
अब नजदीकी लोग कह रहे हैं कि पश्चिम के गिरते जलस्तर में हैंडपंप चलाना काफी मुश्किल होगा।