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यहां सलमान हैं दशरथ, अरबाज कहते हैं जय श्रीराम

Tue, 08 Oct 2013 02:30 PM IST
नीरज अंबुज/लखनऊ
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त्रिपुरचंद बख्शी के बनवाए तालाब(बख्शी का तालाब) के मैदान में होती है वह ऐतिहासिक रामलीला जिसकी मिसाल हिन्दुस्तान ही नहीं विदेशों में भी दी जाती है। साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल।
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चूंकि, राम लक्ष्मण, जानकी और रावण जैसे सभी महत्वपूर्ण किरदार यहां मुस्लिम कलाकारों द्वारा निभाए जाते हैं।

समां तब बंधता है जब तुलसीदास कृत रामायण के संवादों में उर्दू बोलने वाली जुबां की मिठास घुलती है।

मेले के संयोजक गणेश रावत बताते हैं कि वर्ष 1972 में रुदही ग्राम पंचायत के तत्कालीन ग्राम प्रधान मैकूलाल यादव और डॉ. मुजफ्फर ने इस रामलीला की नींव रखी थी।

फिर इस पंरपरा को क्रमश: उनके पुत्र विदेश पाल यादव व मंसूर अहमद ने आगे बढाया। 2009 में रामलीला की जिम्मेदारी नगर पंचायत प्रशासन को मिल गई।

उन्होंने बताया कि यहां की खासियत शिव बारात है। जिसमें गाजे-बाजे के साथ ऊंट, हाथी व घोड़े शामिल होते हैं। शुरुआत में मुसलमानों ने शौकिया तौर पर किरदार निभाए, फिर यही शौक उनका शगल बन गया।
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संयोजक बताते हैं कि इस बार मंचन 14 अक्तूबर से शुरू होगा। जहां भव्य शिव बारात गाजे-बाजे के साथ निकलेगी, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊंट भी शामिल होंगे।

संयोजक बताते हैं कि दशरथ नंदन की भूमिका सलमान खान, लक्ष्मण अरबाज खान, जनक शेर खान, भरत मो. सरवर, लंकेश मो. नसीम, मेघनाद साहिल और कौशल्या का किरदार सैयद जैदी निभा रहे हैं। ये कलाकार लम्बे अर्से से रामलीला से जुड़े हुए हैं।

मिल चुका है राष्ट्रीय एकता पुरस्कार
चालीस वर्ष पुरानी यह रामलीला हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। तैयारियों से लेकर मंचन तक की सभी जिम्मेदारी क्षेत्र केहिन्दू व मुस्लिम मिलकर पूरी करते हैं।

इसी सौहार्द को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2000 में इस रामलीला को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की ओर से ‘राष्ट्रीय एकता पुरस्कार’ से अलंकृत किया जा चुका है। शहर की एकलौती ऐसी रामलीला है, जिसे यह पुरस्कार मिला है।
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