लखनऊ। सीजेएम सुशील कुमारी की कोर्ट में प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह ने शनिवार सुबह पूर्व सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कराने की अर्जी डाली। सुनवाई के बाद दोपहर में सीजेएम ने इसका आदेश दे दिया। हालांकि पुलिस ने दबिश देनी शुरू की तो पूर्व सांसद फरार हो गए।
प्रभारी निरीक्षक ने अर्जी दी थी कि जौनपुर के सिकरारा थानाक्षेत्र के वनसफा निवासी पूर्व सांसद धनंजय सिंह लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार शारदा अपार्टमेंट के ओ-ब्लॉक में रहते हैं। पुलिस ने वहां दबिश दी तो सुराग नहीं मिला। इसके बाद गुडंबा के इडेन एन्क्लेव निकट साडियाना मैरिज हॉल, कुर्सी रोड पर पुलिस ने दबिश दी, लेकिन आरोपी पूर्व सांसद वहां भी नहीं मिले। उन्हें पहले भी पुलिस ने बयान दर्ज कराने व पूछताछ के लिए नोटिस दिया था, लेकिन वह थाने नहीं आए थे। इसके बाद कोर्ट ने धनंजय सिंह के आत्मसमर्पण के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल होने के संबंध में रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
अजीत की हत्या में पत्नी समेत चार ने दिया पूर्व सांसद के शामिल होने का बयान
अजीत सिंह की हत्या में पूर्व सांसद का नाम खोलने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने इस वारदात में शामिल कई लोगों को रिमांड पर लिया। उनसे पूछताछ की। वहीं मृतक पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की पत्नी से पूछताछ की। इसके बाद पूर्व सांसद व बाहुबली धनंजय सिंह के वारदात में शामिल होने का खुलासा किया। पुलिस ने पहले उन्हें दबोचने की कोशिश की लेकिन असफल होने के बाद शनिवार को गैरजमानती वारंट जारी कराया। अगर पूर्व सांसद की गिरफ्तारी नहीं हो पाती है तो पुलिस भगोड़ा घोषित कर उनकी संपत्ति भी कुर्क कर सकती है।
कठौता चौराहे पर हुए गैंगवार में अजीत सिंह की हत्या 6 जनवरी को की गई थी। दूसरे दिन ही अजीत की पत्नी रानू सिंह ने मऊ में जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, आजमगढ़ के माफिया कुंटू सिंह उर्फ ध्रुव सिंह, अखंड सिंह व गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर के खिलाफ लिखित तहरीर दी थी। मऊ पुलिस ने लखनऊ में वारदात होने केकारण उसे संबंधित थाने में देने की बात कहकर वापस भेज दिया। वहीं विभूतिखंड में अजीत के करीबी मोहर सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। रानू की तहरीर बाद में मिली। ऐसे में मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया गया। पुलिस ने रानू का बयान दर्ज कराया जिसमें उसने खुलेआम पूर्व सांसद धनंजय सिंह, अखंड सिंह, ध्रुव उर्फ कुंटू सिंह, गिरधारी उर्फ डॉक्टर का नाम लिया था। पुलिस ने उसके लिखित बयान को अपनी कार्रवाई में शामिल कर लिया। इसके बाद पूर्व सांसद के खिलाफ साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए।
डॉक्टर के बयान से मिली मजबूती
प्रभारी निरीक्षक चंद्रशेखर सिंह केमुताबिक, गैंगवार में एक शूटर के घायल होने की जानकारी हुई तो पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। पता चला कि उसका इलाज सुल्तानपुर के एक निजी अस्पताल में किया गया। पुलिस वहां पहुंची, अस्पताल के मालिक व चिकित्सक डॉ. एके सिंह की तलाश शुरू की। जब वह नहीं मिले तो पुलिस ने सफीना नोटिस जारी किया। नोटिस जारी होने के बाद डॉ. एके सिंह विभूतिखंड थाने पहुंचे। वहां उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया जिसमें कहा कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने ही उनको कॉल कर घायल शूटर का इलाज करने को कहा था। उसे अपने करीबी विपुल सिंह के साथ अस्पताल भेजा था जहां उनके जूनियर डॉक्टर ने इलाज किया। उन्हें बताया गया था कि घायल को पेट में सरिया लगी है। जूनियर डॉक्टर ने भी यही बात डॉ. एके सिंह को बताई थी। शरीर में गोली नहीं मिली थी जिससे पुष्टि नहीं हो सकी। पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 176 की कार्रवाई की। उन्हें थाने से पांच लाख के निजी मुचलके पर थाने से छोड़ा गया था। डॉ. एके सिंह के बयान के बाद पुलिस को पूर्व सांसद के खिलाफ और सबूत मिले जिसके आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। पुलिस ने नोटिस जारी किया था लेकिन पूर्व सांसद ने अपना बयान नहीं दर्ज कराया।
गिरधारी व संदीप ने भी खुलकर लिया धनंजय का नाम
पुलिस के मुताबिक, कस्टडी रिमांड में संदीप बाबा ने कुंटू सिंह, अखंड सिंह और धनंजय सिंह का नाम लिया था। वहीं उसने शूटरों केइंतजाम के लिए गिरधारी का नाम बताया था। पुलिस ने 13 फरवरी को गिरधारी को तीन दिन के कस्टडी रिमांड में लिया था। 13 व 14 फरवरी को उसने अपना बयान दर्ज कराया जिसमें पूर्व सांसद के इशारे पर अजीत की हत्या करने की बात कही। उसने बताया कि सांसद ने ही शूटरों के रहने का ठिकाना तय किया था। उनके रहने व खाने का खर्च भी वही उठाते थे। खर्च की रकम अंकुर के खाते में जमा की जाती थी जिसे जरूरत के मुताबिक गिरधारी के इशारे पर खर्च किया जाता था। शूटरों के घूमने का भी इंतजाम धनंजय सिंह ने ही किया था। पुलिस के मुताबिक, असलहों के इंतजाम में भी धनंजय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। धनंजय खुद न सामने आकर वह अपने करीबी विपुल सिंह के जरिए सारे इंतजाम करता था।
फरार शूटरों की तलाश में दिल्ली, मुंबई में दबिश
पुलिस के मुताबिक, अजीत सिंह की हत्या के लिए पूर्वांचल के शॉर्प शूटर गिरधारी उर्फ डॉक्टर ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के माफिया उधम सिंह से संपर्क किया था। उधम सिंह भी कुंटू के साथ आजमगढ़ जेल में बंद है। गिरधारी उसके जरिए ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सुनील राठी गैंग से संपर्क में आया। वहीं से राजेश तोमर उर्फ जय, रवि यादव, बंटी उर्फ मुस्तफा से बातचीत की। तीनों को लखनऊ पहुंचने के लिए रुपये दिए। तीनों काफी दिनों तक अजीत की रेकी करते रहे। इसके बाद शूटरों ने 6 जनवरी को वारदात को अंजाम दिया। पुलिस केमुताबिक ,गैंगवार में अभी चार शूटर फरार हैं जिनकी तलाश की जा रही है। फरार शूटरों में राजेश तोमर, रवि यादव, बंटी उर्फ मुस्तफा और अंकुर उर्फ शिवेंद्र सिंह शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी पर इनाम भी घोषित कर रखा है।
बंटी की पत्नी व गर्लफ्रेंड से हुई पूछताछ
पुलिस, बंटी उर्फ मुस्तफा की तलाश करती हुई दिल्ली पहुंच गई। वहां मुस्तफा तो नहीं मिला लेकिन एक ठिकाने पर उसकी पत्नी और दूसरे पर उसकी गर्लफ्रेंड मिली। पुलिस ने दोनों से अलग-अलग पूछताछ की। पूछताछ के बाद कई जानकारी हासिल कर पुलिस वापस आ गई। पुलिस के मुताबिक, मुस्तफा दिल्ली व महाराष्ट्र में कई वारदात कर चुका है। वहां से भी वांटेड है। दोनों राज्यों की पुलिस उसकी तलाश कर रही है। वहीं एक अहम सुराग हाथ लगा कि बंटी उर्फ मुस्तफा राजस्थान केविश्नोई गैंग से ताल्लुक रखता है। पुलिस इन तीनों राज्यों से उसके बारे में जानकारी जुटा रही है। पुलिस को आशंका है कि वह इन्हीं में किसी एक स्थान पर अपना ठिकाना बनाए है।
गिरधारी के मोबाइल ने खोले राज
पुलिस के मुताबिक ,जौनपुर के पूर्व सांसद व बाहुबली धनंजय सिंह को अजीत सिंह हत्याकांड के बारे में सारी जानकारी थी। हत्या की साजिश रचने की शुरूआत से लेकर शूटरों को भगाने व छिपाने तक के बारे में हर एक कदम की जानकारी थी। वह लगातार सभी के संपर्क में था। वारदात के मुख्य शूटर गिरधारी उर्फ डॉक्टर ने 14 फरवरी को विभूतिखंड पुलिस को अलकनंदा अपार्टमेंट से एक मोबाइल बरामद कराया जिसें सिर्फ पांच नंबर थे। जिन पर गिरधारी लगातार बात करता था। पुलिस के मुताबिक, एक मोबाइल नंबर ऐसा है जिस पर पूर्व सांसद से बातचीत भी हुई है। इसके अलावा गिरधारी शूटरों से बातचीत करने के लिए इस मोबाइल का प्रयोग करता था। गिरधारी ने पुलिस को बताया था कि अजीत की हत्या में असलहों के इंतजाम में भी धनंजय सिंह ने पूरा सहयोग दिया था।
गिरधारी के एनकाउंटर के बाद बयान को गैरकानूनी बताया
14 फरवरी की रात को पुलिस कस्टडी से भागते समय मुख्य शूटर गिरधारी उर्फ डॉक्टर मुठभेड़ में ढेर हो गया था। इसके बाद से पुलिस पूर्व सांसद को दबोचने की तैयारी में जुट गई तो वहीं उनके सहयोग बचाने में। पूर्व सांसद को बचाने के लिए कोर्ट की भी शरण ली गई। 15 फरवरी को सीजेएम कोर्ट में अर्जी डाली गई जिसमें पहले एनकाउंटर को गैरकानूनी बताया। इसके बाद दूसरे दिन एक याचिका दायर की जिसमें कहा गया कि एनकाउंटर में मारे गये शूटर गिरधारी का बयान पुलिस की कार्रवाई से बाहर किया जाए क्योंकि पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन मुठभेड़ में नहीं किया था। इस अर्जी पर सुनवाई के दौरान सीजेएम सुशील कुमारी ने पुलिस कश्मिनर डीके ठाकुर सहित पूर्वी जोन के डीसीपी संजीव सुमन, एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक, इंस्पेक्टर विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह व मुठभेड़ में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों से कोर्ट में पक्ष रखने का निर्देश दिया। शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर सहित सभी अधिकारियों ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। वहीं शनिवार सुबह इंस्पेक्टर विभूतिखंड ने पूर्व सांसद के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी करने की अर्जी डाली।