लल्लू ने कहा, मैं मजदूर रहा हूं। मैंने गुड़गांव में खुद मजदूरी की है। मैं श्रमिकों के पैरों के छालों का दर्द महसूस कर सकता हूं। मैं उनकी भूख को समझ सकता हूं, उनकी हर बेबसी से वाकिफ हूं। श्रमिक भाई-बहनों के लिए सौ बार जेल जाने को तैयार हूं।
वकील से भी नहीं मिलने दिया
लल्लू ने कहा, सरकार ने मुझे अपने वकील तक से नहीं मिलने दिया। मुझे सिर्फ इस बात की फिक्र थी कि सड़कों पर हजारों की तादाद में लोग पैदल चल रहे होंगे। उनके पांव में छाले पड़ गए होंगे। मुझे इस बात की चिंता थी लोगों तक खाना कैसे पहुंच रहा होगा। जो बीमार हैं उन तक दवा कैसे पहुंच रही होगी।
1.15 करोड़ लोगों के भोजन का बंदोबस्त किया
पीसीसी अध्यक्ष ने कहा, हमारी राष्ट्रीय महासचिव के निर्देश पर पूरे प्रदेश में 1 करोड़ 15 लाख लोगों के लिए भोजन और राशन का बंदोबस्त किया गया। 10 लाख से अधिक लोगों की दूसरे प्रदेशों में मदद हुई है। मेरी रिहाई के लिए पार्टी ने सेवा सत्याग्रह आंदोलन किया और हर जिले में रसोईघर चलाकर जरूरतमंदों को भोजन कराया गया।