हवा में बढ़ता प्रदूषण अब स्वस्थ लखनऊ वालों को भी बीमार बना रहा है। देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर बन चुका लखनऊ अब इससे पैदा हो रही बीमारियों का भी सामना कर रहा है।
केजीएमयू और सिविल अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि लोग आंख, गला और फेफड़ों में संक्रमण की समस्या लेकर आ रहे हैं।
मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री से पता चल रहा है कि उन्हें बीमार करने में प्रदूषण का बड़ा रोल है। वहीं प्रदूषण से बचाने के लिए एकमात्र जरिया एन-95 मास्क है जो कि इतना महंगा है कि इसे मध्यम वर्ग के लोगों के उपयोग करना संभव नहीं है।
77 प्रतिशत ट्रैफिक कांस्टेबलों की आंखों में जलन
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) ने वायु प्रदूषण का असर सड़क किनारे रहने वाले लोगों पर पता करने के लिए स्टडी कराई।
स्टडी में पता चला कि 77.47 प्रतिशत ट्रैफिक कांस्टेबल, 74.07 प्रतिशत दुकानदार और 20 प्रतिशत ड्राइवरों ने आंखों में जलन की शिकायत की।
इसके अलावा 33.49 प्रतिशत ड्राइवर, 21.29 प्रतिशत दुकानदार और 26.12 प्रतिशत ट्रैफिक कांस्टेबलों ने आंखें लाल होने यानी रेडनेस की शिकायत की। रिपोर्ट के मुताबिक अधिकांश लोग किसी न किसी तरह की आंखों की बीमारी से परेशान थे।
केजीएमयू के ऑप्थमोलॉजी विभाग की ओपीडी के मरीजों में भी इसी तरह का ट्रेंड डॉक्टरों को मिला है। इनमें करीब 30 प्रतिशत मरीज प्रदूषण की वजह से रेडनेस, आंखों से पानी आना और एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
बीमारी
- आंखों का लाल होना
- आंखों में जलन
- आंखों से पानी का आना
- एलर्जी जैसे खुजली का बढ़ जाना
- कंजेक्टिवाइटिस