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सावधानः अब ‘खतरनाक’ होने लगी लखनऊ की हवा, स्मॉग से सांस लेना हो रहा मुश्किल

Sat, 02 Nov 2019 11:21 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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छाया धुंध व कोहरा - फोटो : अमर उजाला
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पांच दिन से ‘बहुत खराब’ बनी हुई लखनऊ की हवा अब ‘खतरनाक’ हो रही है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 400 के नजदीक पहुंच गया है। शुक्रवार को तालकटोरा का एक्यूआई जहां 399 रिकॉर्ड किया गया, वहीं लालबाग में यह 392 दर्ज हुआ। वहीं, स्मॉग ने सांस लेना भी मुश्किल कर दिया है।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ की हवा तेजी से बिगड़ रही है। बुधवार को 326 रहा एक्यूआई 24 घंटे में ही 372 पर पहुंच गया। 48 घंटे बाद शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 रिकॉर्ड किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि बहुत खराब बनी हुई राजधानी की हवा लंबे समय तक लोगों की सेहत खराब कर सकती है।

इसका असर सांस लेने में दिक्कत के अलावा त्वचा, आंख के रोगों के रूप में सामने आ सकता है। इससे बचने को जहां प्रदूषण कम किया जाना जरूरी है, वहीं लोगों को भी एक्यूआई बढ़े होने के समय घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।

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देखें- इस तरह बढ़ा वायु प्रदूषण

प्रतीकात्मक तस्वीर
लखनऊ की हवा हुई ‘लाल’
  क्षेत्र             एक्यूआई
तालकटोरा     399
अलीगंज       384
लालबाग       392
गोमतीनगर   346

इस तरह बढ़ा वायु प्रदूषण
तारीख            एक्यूआई
27 अक्तूबर        186 पीला
28 अक्तूबर        305 लाल
29 अक्तूबर        314 लाल
30 अक्तूबर        326 लाल
31 अक्तूबर        352 लाल
1 नवंबर            382 लाल
 
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नगर निगम ने शुरू किया पानी छिड़काव

महाराणा प्रताप मार्ग पर पेड़ों का छिड़काव करते नगर निगम के कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
जानें कैसी है हवा की सेहत
एक्यूआई             रंग        गुणवत्ता
50 से कम        गहरा हरा    अच्छी
51 से 100        हरा        संतोषजनक
101 से 200        पीला        सुधरी हुई
201 से 300         गहरा पीला    खराब
301 से 400         लाल        बहुत खराब
401 से अधिक        गहरा लाल    खतरनाक

शासन से फटकार के बाद शुक्रवार को नगर निगम ने सड़कों के अलावा पेड़ों पर पानी का छिड़काव शुरू करा दिया। हालांकि, इसके बाद भी वायु प्रदूषण कम करने में मदद नहीं मिली। अभी पानी का छिड़काव वीआईपी इलाकों में ही किया जा रहा है। इसकी जरूरत अभी प्रमुख सड़कों और निर्माण वाली साइटों के आसपास है।
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