एचआईवी-एड्स के साथ जी रहे लोगों में संक्रमण की जांच के लिए अब वायरल लोड टेस्टिंग की सुविधा केजीएमयू लखनऊ के साथ बीएचयू वाराणसी और मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी उपलब्ध है। नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने प्रदेश को तीन वायरल लोड टेस्टिंग मशीनें दी हैं। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज को भी एक मशीन दी गई थी लेकिन उसे वापस कर दिया गया है। इस तकनीक से मरीजों में एचआईवी वायरस के लोड की जांच की जा सकती है।
प्रदेश में एचआईवी-एड्स पीड़ित मरीजों के लिए अभी तक केवल सीडी-4 काउंट की ही सुविधा थी। इस तकनीक से संक्रमण से लड़ने वाली सीडी-4 टी कोशिकाओं की जांच हो सकती है। प्रदेश में सीडी-4 टेस्टिंग की 21 मशीनें हैं।
नई वायर लोड टेस्टिंग मशीन से शरीर में एचआईवी वायरस के स्तर को जांचा जा सकता है। जीवन भर एंटी रिट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) लेने वाले एचआईवी के साथ जी रहे लोगों पर उपचार कितना प्रभावी हो रहा है, यह जानने में इस मशीन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी की डॉ. प्रीति पाठक ने बताया कि एचआईवी मरीजों के लिए यह टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है क्योंकि यह देखा गया है कि कई बार इन पर दवाएं काम नहीं करतीं। डॉक्टरों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती। वायरल लोड टेस्ट से यह पता चल जाएगा कि मरीज पर दवा का कितना असर हो रहा है।