देशभर में अगले शैक्षिक सत्र से इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थानों में कॉमन सिलेबस लागू होगा। साथ ही इन संस्थानों की फीस में कमी की जाएगी।
ये बातें सोमवार को ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) के उपाध्यक्ष डॉ. एमपी पुनिया ने कही।
वह यहां डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) में तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नीट की सफलता के बाद पूरे देश में इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट कराया जाएगा।
डॉ. पुनिया ने कहा कि प्रति 100 इंटर पास स्टूडेंट्स में से मात्र 25 को ही हम उच्च शिक्षा दे पा रहे हैं। अमेरिका में यह आंकड़ा 87 और जापान-यूके में 70 है। इसका एक बड़ा कारण महंगी शिक्षा है।
इसलिए हम फीस को कम करने पर काम कर रहे हैं। विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि छात्रों के कोर्स का 20 फीसदी हिस्सा ऑनलाइन करें।
इससे शिक्षकों की संख्या कम होगी इससे खर्च में कमी आएगी। उन्होंने कहा, देश में यूनिफॉर्म फीस के लिए गठित जस्टिस कृष्णा कमेटी अक्तूबर में अपनी रिपोर्ट देगी।
इसके बाद अधिकतम-न्यूनतम शुल्क व शहरों के हिसाब से शुल्क तय किए जाएंगे। इसे अगले सत्र से प्रभावी बनाया जाएगा।
डॉ. पुनिया ने कहा कि मॉडल पाठ्यक्रम बनाने के बाद उसे अपग्रेड कर ऑनलाइन कर दिया गया है। इसे अगले सत्र से देशभर में लागू किया जाएगा।
इसमें राज्य अपने स्तर से 30 फीसदी तक बदलाव कर सकेंगे। इसी प्रकार 200 क्रेडिट की डिग्री को कम करके 160 क्रेडिट की कर दी है।
इससे स्टूडेंट्स पर पढ़ाई का प्रेशर कम होगा। छात्र को सत्र की शुरुआत में 21 दिन का ओरिएंटेशन प्रोग्राम देंगे।
इंजीनियरिंग कॉलेजों को बंद करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में पांच साल तक 30 फीसदी से कम दाखिले होंगे, उन्हें एआईसीटीई बंद करेगी। वैसे कॉलेज खुद बंदी के लिए आवेदन कर रहे हैं।