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इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की फीस कम करने की तैयारी, ऑनलाइन होंगे कोर्स

Tue, 05 Sep 2017 01:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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इंजीनियर/सांकेतिक - फोटो : source
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देशभर में अगले शैक्षिक सत्र से इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थानों में कॉमन सिलेबस लागू होगा। साथ ही इन संस्थानों की फीस में कमी की जाएगी।
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ये बातें सोमवार को ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) के उपाध्यक्ष डॉ. एमपी पुनिया ने कही।

वह यहां डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) में तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि नीट की सफलता के बाद पूरे देश में इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट कराया जाएगा।

डॉ. पुनिया ने कहा कि प्रति 100 इंटर पास स्टूडेंट्स में से मात्र 25 को ही हम उच्च शिक्षा दे पा रहे हैं। अमेरिका में यह आंकड़ा 87 और जापान-यूके में 70 है। इसका एक बड़ा कारण महंगी शिक्षा है।
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इसलिए हम फीस को कम करने पर काम कर रहे हैं। विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि छात्रों के कोर्स का 20 फीसदी हिस्सा ऑनलाइन करें।

इससे शिक्षकों की संख्या कम होगी इससे खर्च में कमी आएगी। उन्होंने कहा, देश में यूनिफॉर्म फीस के लिए गठित जस्टिस कृष्णा कमेटी अक्तूबर में अपनी रिपोर्ट देगी।

इसके बाद अधिकतम-न्यूनतम शुल्क व शहरों के हिसाब से शुल्क तय किए जाएंगे। इसे अगले सत्र से प्रभावी बनाया जाएगा।

डॉ. पुनिया ने कहा कि मॉडल पाठ्यक्रम बनाने के बाद उसे अपग्रेड कर ऑनलाइन कर दिया गया है। इसे अगले सत्र से देशभर में लागू किया जाएगा।

इसमें राज्य अपने स्तर से 30 फीसदी तक बदलाव कर सकेंगे। इसी प्रकार 200 क्रेडिट की डिग्री को कम करके 160 क्रेडिट की कर दी है।

इससे स्टूडेंट्स पर पढ़ाई का प्रेशर कम होगा। छात्र को सत्र की शुरुआत में 21 दिन का ओरिएंटेशन प्रोग्राम देंगे।

इंजीनियरिंग कॉलेजों को बंद करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में पांच साल तक 30 फीसदी से कम दाखिले होंगे, उन्हें एआईसीटीई बंद करेगी। वैसे कॉलेज खुद बंदी के लिए आवेदन कर रहे हैं।

इंजीनियरिंग में योग्य शिक्षकों का अभाव

डॉ. पुनिया ने माना कि इंजीनियरिंग संस्थानों में योग्य शिक्षकों का अभाव है। इसका सीधा असर छात्रों के परिणाम पर दिखता है। मौजूदा समय में देशभर के इंजीनियरिंग संस्थानों में 37 लाख सीटें हैं, लेकिन हर वर्ष लगभग 20 लाख ही दाखिले होते हैं। इन 20 लाख में से महज 6.50 लाख छात्र को ही कैंपस प्लेसमेंट मिलता है। इसे सुधारा जाएगा। 

शिक्षकों के लिए साइंटिफिक ट्रेनिंग जरूरी

डॉ. पुनिया ने कहा कि शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है। लिहाजा अगले सत्र से छह माह की साइंटफिक ट्रेनिंग जरूरी की जा रही है। इसका कोर्स भी बना दिया गया है। वहीं, एमटेक में दूसरे साल इंडस्ट्री में जाकर थीसिस करनी होगी। इसके लिए देशभर की 400 इंडस्ट्री के साथ एमओयू किया है।

हिंदी में पढ़ाई पर जोर, किताबें लिखने को फंड
एआईसीटीई उपाध्यक्ष ने कहा कि इंजीनियरिंग का पूरा कोर्स अंग्रेजी में है। नतीजतन, ग्रामीण परिवेश से आने वाले युवाओं का एक साल तो अंग्रेजी समझने में लग जाता है। ऐसे में हम हिंदी-अंग्रेजी मिक्स पढ़ाई पर जोर दे रहे हैं। इसमें किताब लिखने वाले शिक्षकों को दो लाख तक की ग्रांट भी देंगे। तकनीकी शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिए स्टार्ट-अप को बढ़ावा देंगे। इस क्रम में 300 स्टार्ट-अप शुरू किए गए हैं, इन्हें अवार्ड भी देंगे।
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अच्छे संस्थानों को मार्गदर्शन स्कीम में मिलेंगे 50 लाख

एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों के प्रतिनिधियों को डॉ. पुनिया ने बताया कि लैब-रिसर्च, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए उन्हें एआईसीटीई ग्रांट देगी। संस्थान इसके लिए आवेदन करे। ‘मार्गदर्शन’ स्कीम में अच्छे इंस्टीट्यूट को 50 लाख दिए जाएंगे। संस्थान को अपने आसपास के 10 इंस्टीट्यूट को अपग्रेड करना होगा।
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