फिक्की फ्लो के कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी के व्याख्यान को सुनते लोग। -संवाद
लखनऊ। राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आत्मा और ब्रह्म की पूर्ण एकरूपता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पूरी तरह नहीं समझ सकता। भारतीय दर्शन में मन, शरीर और आत्मा की अवधारणा वेदांत से उत्पन्न हुई है, जो मानव चेतना को गहराई से परिभाषित करती है।
गोमतीनगर स्थित होटल में शुक्रवार को फिक्की फ्लो की ओर से आयोजित ‘भारत का मन, तन और आत्मा’ विषयक विशेष सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने कहा कि चेतना का संबंध मन से होता है, जबकि मस्तिष्क केवल एक रिसीवर की तरह कार्य करता है। देश में लोग अब स्वास्थ्य, मानसिक शांति और जागरूक जीवनशैली के प्रति अधिक सचेत हो रहे हैं, जिससे भावनात्मक रूप से सशक्त और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज का निर्माण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत महिलाओं को सर्वोच्च सम्मान देने वाली संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय परंपरा में महिलाओं को ऊर्जा का स्रोत माना गया है और इसकी झलक नवरात्रि जैसे पर्वों में देखने को मिलती है। केंद्र सरकार ने महिलाओं को समाज में उचित सम्मान और स्थान दिलाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में भारत आज विश्व में अग्रणी स्थान पर पहुंच चुका है।
कार्यक्रम में निजी अस्पताल के निदेशक डॉ. मयंक सोमानी ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल के महत्व पर जोर दिया। बदलती जीवनशैली के बीच नियमित स्वास्थ्य जांच और मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। लोगों को अनावश्यक दबाव से बचते हुए संतुलित जीवनशैली अपनानी चाहिए। कार्यक्रम की परिकल्पना फिक्की फ्लो लखनऊ की चेयरपर्सन सिमरन साहनी ने की, जबकि संचालन ज्योति दीवान ने किया। कार्यक्रम में फिक्की फ्लो की पूर्व चेयरपर्सन आरुषि टंडन, स्वाति वर्मा, विभा अग्रवाल समेत अन्य मौजूद रहे।
फिक्की फ्लो के कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी के व्याख्यान को सुनते लोग। -संवाद