लखनऊ। इंटीग्रल विश्वविद्यालय के इंटीग्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में सोमवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कृषि कांग्रेस- विबकाॅन-2025 की शुरूआत हुई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप्र सरकार के राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि एआई आधारित स्मार्ट खेती भविष्य की जरूरत है। आधुनिक तकनीक अपनाने से खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
विकसित भारत के लिए एआई व रोबोटिक्स आधारित स्मार्ट कृषि विषय पर आधारित इस इस सम्मेलन में खेती में एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, स्मार्ट मशीनों और नई तकनीकों के उपयोग पर सरल और उपयोगी चर्चा की गई।
इंटीग्रल विश्वविद्यालय के संस्थापक व कुलपति प्रो. एस. डब्ल्यू. अख्तर ने कहा कि तकनीक आधारित खेती से ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी। वहीं रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कुलपति प्रो. पंजाब सिंह ने जलवायु परिवर्तन, जल संकट और घटती भूमि गुणवत्ता को बड़ी चुनौती बताते हुए स्मार्ट खेती को इसका समाधान बताया।
उप्र. कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ, कृषि उद्यमी और प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
अफ्रीकन-एशियन रूरल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के महासचिव डॉ. मनोज एन.सिंह ने वैश्विक स्तर पर एआई की भूमिका पर बात की। भारत में गांबिया के उच्चायुक्त मुस्तफा जवारा ने देशों के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने पर जोर दिया।
सम्मेलन में पद्मश्री कलीमुल्लाह खान, पद्मश्री उमा शंकर पांडेय, यूपीसीएआर के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
किसान एक्सपो और स्मार्ट खेती तकनीक बनीं आकर्षण
सम्मेलन में विबकाॅन-2025 एक्सपो में एआई आधारित कृषि उपकरण, रोबोटिक्स मशीनें और नई तकनीकों के मॉडल प्रदर्शित किए गए , जो किसानों और विद्यार्थियों के लिए खास आकर्षण रहे। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. मो. हारिस सिद्दीकी और संचालन प्रो. अलवीना फारूकी व प्रो. सबा सिद्दीकी ने किया।