याददाश्त और सोचने की क्षमता प्रभावित करने वाली बीमारी अल्जाइमर को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित एमआरआई जांच से बेहद शुरुआती अवस्था में पकड़ा जा सकता है। केजीएमयू के रेडियोडायग्नोसिस विभाग ने एआई आधारित एमआरआई जांच शुरू की है। इसमें यह बीमारी बेहद शुरुआती स्थिति में पकड़ में आ रही है।
रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रो. दुर्गेश कुमार द्विवेदी और मानसिक स्वास्थ्य विभाग के प्रो. शैलेंद्र एम. त्रिपाठी ने एआई आधारित एमआरआई की शुरुआत की है। प्रो. दुर्गेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि जांच में मस्तिष्क में होने वाले बेहद छोटे बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। मस्तिष्क में हिप्पोकैंपस स्मृति को नियंत्रित करता है।
इसी तरह वायरिंग कनेक्शन मस्तिष्क को विभिन्न संदेश पहुंचाता है। ये दोनों क्षेत्र अल्जाइमर में सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त होते हैं। अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण होने पर ही अगर एमआरआई जांच की जाए तो फिर इसकी पहचान करके दवाएं शुरू की जा सकती हैं। इससे बीमारी बढ़ने से रोका जा सकता है।
एआई अहम क्यों
प्रो. द्विवेदी ने बताया कि डीप लर्निंग और एआई मस्तिष्क के स्कैन के उस मामूली पैटर्न को भी देख सकता है, जिन्हें हमारी आंखें नहीं देख पातीं। ऐसा होने पर डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिलती है कि कुछ मरीजों की हालत तेजी से क्यों बिगड़ती है जबकि कई की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है। इन पैटर्न का पता चलने पर व्यक्तिगत देखभाल और उपचार रणनीतियों की योजना काफी पहले बनाई जा सकती है।
देश में अल्जाइमर के करीब 7.4% मरीज
देश में इस समय अल्जाइमर रोग का प्रसार करीब 7.4% है। यह बीमारी आमतौर पर 65 वर्ष की आयु के बाद शुरू होती है। देश में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। वर्तमान उपचार में केवल इसकी प्रगति को धीमा कर सकते हैं।