अयोध्या में कैथाना स्थित अपने आवास पर बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी सुबह से ही आने जाने वाले लोगों से घिरे थे। फैसले का जिक्र आते ही बोले-अमा यार, तू आज सोचत हव, अब्बू तौ 2010 कय फैसला आवा तभी बाबरी मस्जिद जाना छोड़ दीहिन..।
इसी बीच कुछ अंग्रेजी के पत्रकार आते हैं तो इकबाल टोपी संभालने के साथ खड़ी भाषा बोलने के लिए तैयार हो जाते हैं और कहते हैं कि ये बाहरी लोग क्या समझेंगें। अब्बू (बाबरी मस्जिद के मुद्ई हाशिम अंसारी) हाईकोर्ट का फैसला पहले ही समझ गए थे कि रामजन्मस्थान का मुद्दा भारी पड़ेगा।
जब कमिश्नर और जज निरीक्षण करने आते थे तो वे नहीं जाते थे। इकबाल के पास फैजाबाद से आए मौलाना बादशाह, अशद उल्ला बैठे थे। इकबाल ने बताया कि नदीम वकील कई लोगों के साथ आए थे।
नफीस अहमद आए थे, सब लोग यहीं के हैं। इसी बीच जहूर अहमद के पौत्र के रूप में पक्षकार में शामिल मोहम्मद उमर आते हैं। कहते हैं कि आगे की तैयारी को लेकर अभी कुछ भी तय नहीं है। मोहल्ले के लोग अयोध्या के बाहर नमाज पढ़ने नहीं जाएगें। पांच एकड़ जमीन देनी है तो परिसर में ही दी जाए।