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Lucknow News: 70 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद युवती ने मौत को हराया

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डॉक्टरो के साथ शगुन। 
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लखनऊ। अयोध्या निवासी 21 साल की शगुन के लिए 28 फरवरी का दिन जिंदगी का भयावह मोड़ लेकर आया। भीषण सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल शगुन परिजनों को बेहोशी की हालत में मिलीं। छाती में गहरी चोटें आने से उन्हें केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने से उनके बचने की उम्मीद बहुत कम दिख रही थी। हालांकि, 70 दिनों के संघर्ष और डॉक्टरों की अटूट कोशिशों के बाद शगुन ने आखिरकार मौत को मात देकर जीवन की ओर वापसी कर ली है।
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जटिल चिकित्सा प्रक्रिया और जीवन रक्षक उपाय

तीन मार्च को थोरेसिक विभाग के डॉ. शैलेंद्र के नेतृत्व में शगुन का बड़ा ऑपरेशन हुआ। हादसे में उनका बायां फेफड़ा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था, जिसे ऑपरेशन से निकालना पड़ा। ऑपरेशन के बाद शगुन को एनेस्थीसिया विभाग के सीसीयू-2 में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उनकी जान बचाने के लिए जद्दोजहद लगातार जारी रही। इलाज के दौरान शगुन के दिल का दाहिना हिस्सा भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा था। इससे दिल के चारों ओर पानी भर गया और ब्लड प्रेशर भी बहुत कम हो गया। इस गंभीर स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में पेरिकार्डियल टेंपोनाड के रूप में जाना जाता है।

डॉक्टरों ने कैथेटर से पानी निकाला, जिससे स्थिति में कुछ सुधार हुआ। हालांकि, मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। शगुन के पास केवल दाहिना फेफड़ा बचा था। लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने और गहरी सांसों के दबाव से इसमें भी अत्यधिक हवा भर गई, जिसे न्यूमोथोरेक्स कहा जाता है। इस स्थिति के कारण वेंटिलेटर से ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होने लगा और जान पर फिर खतरा मंडराने लगा। डॉक्टरों ने तुरंत नली डालकर फेफड़े से अतिरिक्त हवा निकालकर स्थिति को काबू किया।
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एक फेफड़े के सहारे वेंटिलेटर से मुक्ति

केवल एक फेफड़े के सहारे मरीज को वेंटिलेटर से हटाना डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुई। ट्रैकियोस्टॉमी और हाई फ्लो नेजल ऑक्सीजन की सहायता से धीरे-धीरे शगुन की सांसों को सामान्य किया गया। लगभग 70 दिन तक चले इस अत्यंत कठिन इलाज और निरंतर निगरानी के बाद आखिरकार 12 मई को शगुन को सीसीयू-2 से थोरेसिक वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया।







जीवन की ओर वापसी और परिवार की खुशी

डॉक्टरों ने बताया कि शगुन अब खाना खा रही है। परिवार से बात कर रही है और सहारे से चलना भी शुरू कर चुकी है। उनके परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त किया है।







इस टीम का रहा सहयोग

सीसीयू-2 की पूरी टीम ने शगुन की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। इसका नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका कोहली ने किया। फैकल्टी टीम में डॉ. विपिन सिंह, डॉ. विनोद और डॉ. मयंक शामिल थे। रेजीडेंट डॉक्टरों में डॉ. शिखा, डॉ. अख्तर, डॉ. ज्योति, डॉ. अपूर्वा और डॉ. प्रियांशी ने लगातार मरीज की निगरानी और इलाज का जिम्मा संभाला। नर्सिंग स्टाफ में डॉ. निशा, डॉ. ममता और अन्य का सहयोग रहा।
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