लखनऊ। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति (देवगुरु) को नवग्रहों में सबसे शुभ ग्रह माना गया है। धर्म, ज्ञान, विवाह, संतान, भाग्य और समृद्धि के कारक बृहस्पति ग्रह अपनी दृष्टि से कुंडली के जिस भाव को भी देख लेते हैं, उसके प्रभाव को बढ़ा देते हैं। 12 वर्ष के बाद एक ऐसा संयोग बन रहा है जिसमें देव गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह संयोग देश में आर्थिक स्थिरता और शांति लाने के साथ ही कई राशियों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, गुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर दो जून को सुबह 6:30 बजे होगा। बृहस्पति, कर्क राशि में 31 अक्तूबर की शाम 7:19 बजे तक रहेंगे और उसके बाद सूर्य के आधिपत्य वाली सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। गुरु के कर्क राशि में आने पर हंस राजयोग भी बनता है जो पंच महापुरुष राजयोग में से एक राजयोग है। यह 12 वर्ष बाद बनने वाला शक्तिशाली राजयोग है।
ज्योतिषाचार्य पुनीत पुनीत वार्ष्णेय का कहना है कि देव गुरु बृहस्पति मूलतः मनुष्य के विवेक को नियंत्रित करते हैं। गुरु ग्रह की उच्च राशि कर्क के एक से पांच डिग्री तक होती है। मन से विवेक के जुड़ने की स्थिति मनुष्य को उसके जीवन के उच्च स्तर तक पहुंचने में सहायता करती है। इसी वजह से कर्क राशि को गुरु की उच्च राशि माना जाता है।
एसएस नागपाल ने कहा कि इस बार गुरु अतिचारी (तेज गति) में रहेंगे। इसका मतलब है कि बदलाव बहुत तेजी से और तीव्रता के साथ होंगे। गुरु के कर्क राशि में गोचर का समय विवाह, संतान, उच्च शिक्षा, व्यापार, संपत्ति, धार्मिक यात्रा, निवेश के लिए महत्वपूर्ण है। जिनकी कुंडली में गुरु 6वें, 8वें या 12वें भाव में हैं, उन्हें सेहत और खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण रखना चाहिए। जब गुरु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे तो कुछ समय के लिए आर्थिक स्थिरता, सरकारी कल्याण योजनाओं, कृषि और रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। देश-दुनिया में आर्थिक स्थिरता और शांति आएगी।
इन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव
मेष राशि : गुरु चतुर्थ भाव में उत्तम - गृह सुख, माता का स्वास्थ्य व संपत्ति में वृद्धि। मकान खरीदने के लिए अच्छा समय। मानसिक शांति मिलेगी।
वृषभ राशि : गुरु तृतीय भाव में - पराक्रम, यात्रा, मीडिया और लेखन क्षेत्र में अवसर। भाई-बहन से मतभेद संभव। उद्यम में सतर्कता रखें।
मिथुन राशि : गुरु द्वितीय भाव में - धन वृद्धि, परिवार में खुशी, वाणी से लाभ। वर्ष के उत्तरार्ध में आर्थिक सुधार निश्चित।
कर्क राशि : गुरु स्वयं लग्न में - कई जन्मों का पुण्य फलेगा। विवाह, व्यापार, संतान, स्वास्थ्य में अभूतपूर्व उन्नति। यह आपके जीवन का स्वर्णिम काल हो सकता है।
सिंह राशि : गुरु द्वादश भाव में - खर्च बढ़ेगा पर आध्यात्मिक लाभ और विदेश से अवसर मिलेंगे। विदेश यात्रा या बसने के योग। मोक्ष की दिशा में प्रवृत्ति।
कन्या राशि - गुरु एकादश भाव में - बड़ी इच्छाएं पूरी होंगी, आर्थिक लाभ। विवाह के लिए भी अनुकूल। वर्ष का उत्तरार्ध उत्तम।
तुला राशि - गुरु दशम भाव में - कॅरिअर में बड़ा अवसर, नाम-प्रतिष्ठा, पदोन्नति। व्यापार में विस्तार। राजनीति में जाने वालों के लिए सर्वोत्तम।
वृश्चिक राशि - गुरु नवम भाव में - भाग्यशाली गोचर, भाग्योदय, विवाह, विदेश यात्रा, पिता से संपत्ति। यह आपके जीवन का सर्वश्रेष्ठ वर्ष बन सकता है।
धनु राशि - अष्टम भाव में - गुरु अपनी ही राशि से पंचमेश होकर कर्क में, संतान, बुद्धि और भाग्य का अभूतपूर्व विकास। विरासत या बीमा से लाभ। आध्यात्मिक सिद्धि का काल।
मकर राशि - सप्तम भाव में - विवाह के शुभ योग, जीवनसाथी से सुख, व्यापार साझेदारी में लाभ। संबंधों में सुधार।
कुंभ राशि - गुरु षष्ठ भाव में - प्रतिस्पर्धा पर विजय, ऋण से मुक्ति। चिकित्सा, कानून क्षेत्र में सफलता। थोड़ी स्वास्थ्य सतर्कता बनाए रखें।
मीन राशि- पंचम भाव में - गुरु स्वयं मीन राशि के स्वामी हैं और पंचम भाव में, यह गज केसरी जैसा अद्भुत योग है। संतान, प्रेम, शिक्षा, निवेश में सफलता। जीवन का स्वर्णिम काल।
ये उपाय हो सकते हैं कारगर
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, गुरु के अनुकूल प्रभाव को और बढ़ाने और प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए विष्णु सहस्रनाम का प्रतिदिन पाठ करें। पीले वस्त्र पहनें, पीली वस्तुएं दान करें, गाय को केला खिलाएं, पीली मिठाई का दान करें, विष्णु मंदिर में दर्शन करें, बृहस्पति के मंत्रों का जाप करें, पीपल या केले के वृक्ष में जल और हल्दी अर्पित करें।