शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत दाखिला न देने वाले 10 स्कूलों की मान्यता खत्म होगी। बीएसए ने संयुक्त शिक्षा निदेशक से सीबीएसई बोर्ड के चार, आईसीएसई के तीन और बेसिक शिक्षा परिषद से संबद्ध तीन स्कूलों की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति की है।
इन स्कूलों ने विभाग द्वारा बार-बार नोटिस देने के बाद भी बच्चों को दाखिला नहीं दिया। बीएसए ने इसकी प्रतिलिपि स्कूलों के संबंधित बोर्डों, सीडीओ और डीएम को भी प्रेषित की है। आरटीई के अंतर्गत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर कमजोर आय वर्ग वाले परिवार के बच्चों को दाखिला देने का प्रावधान है।
इसके तहत बेसिक शिक्षा कार्यालय ने तीन ऑनलाइन सूची निकालीं, जिसमें 12,365 बच्चों का दाखिले के लिए नाम प्रकाशित किया गया। मगर जिले के कई एक भी बच्चे को दाखिला नहीं दिया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अमर कांत सिंह ने ऐसे ही 10 स्कूलों की मान्यता खत्म करने के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक से संस्तुति की है। उन्होंने इन स्कूलों की सूची भी प्रेषित कर दी है। इन स्कूलों से विभाग ने दाखिला नहीं देने का कारण भी पूछा था, मगर इन्होंने जो भी कारण बताए वह आरटीई के प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते।
गिनवाए बेतुके कारण
डेमो
- फोटो : डेमो
बेसिक शिक्षा कार्यालय ने इन 10 स्कूलों को दाखिला देने के लिए बच्चों की सूची भी भेजी थी। कई स्कूलों ने विभाग द्वारा नोटिस भेजने पर जवाब भी नहीं दिया। वहीं कुछ ने बच्चों के निवास स्थान की दूरी स्कूल से काफी ज्यादा होने की बात कही। किसी ने बच्चों के उम्र पर आपत्ति दर्ज की तो किसी ने स्कूल का नाम गलत होने पर दाखिला नहीं दिया। लेकिन विभाग द्वारा स्कूल के नाम में सुधार करने पर भी दाखिला नहीं दिया गया।
ये हैं 10 स्कूल और उनकी शाखाएं
बेबी मार्टिन इंटरनेशनल स्कूल तहसीनगंज व दुबग्गा शाखा, एक्जान मॉन्टेसरी स्कूल खालाबजार, ब्राइट-वे स्कूल की सभी शाखाएं, रेड रोज सीनियर सेकंडरी स्कूल राजाजीपुरम, लोयला इंटरनेशनल स्कूल बादशाहनगर, सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल बुद्धेश्वर मोहान रोड, गुरुकुल एकेडमी इंदिरानगर, महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल मोतीनगर, ऐलन हाउस पब्लिक स्कूल वृंदावन योजना और राजकुमार एकेडमी कश्मीरी बाग।
इन स्कूलों ने एक भी बच्चे को दाखिला नहीं दिया है। जबकि कई बार नोटिस दिए गए। कुछ ने बेतुके बहाने बनाए तो कुछ ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। जेडी से इनकी मान्यता खत्म करने की संस्तुति करते हुए संबंधित बोर्ड को भी प्रतिलिपि प्रेषित कर दी गई है। - डॉ. अमर कांत सिंह, बीएसए